अल्मोड़ा।… 9वीं से 13वीं शताब्दी के बीच बने उत्तराखंड के जागेश्वर मंदिर समूह के दर्शन करने के लिए हर साल लाखों पर्यटक देशभर से यहां पहुंचते हैं। पुरातन महत्व के साथ ही आध्यात्मिक और पर्यटन के लिए भी यह मंदिर समूह खासा प्रचलित है।

पर्यटकों को अब यहां घूमने के साथ ही मंदिरों का इतिहास भी सुनने को मिलेगा। पर्यटक जागेश्वर मंदिर समूह के 124 छोटे-बड़े मंदिरों के बारे में जानकारी हासिल कर सकेंगे। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) ने इन मंदिरों पर एक डाक्यूमेंट्री तैयार की है, जिसका प्रदर्शन शुक्रवार 29 मई से शुरू हो रहा है।

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गुरुवार को हल्द्वानी में पर्यटन मंत्री महेश शर्मा ने इस डॉक्यूमेंट्री को लांच किया। डॉक्यूमेंट्री करीब सात मिनट की है। डॉक्यूमेंट्री के प्रदर्शन के लिए जागेश्वर म्यूजियम में व्यवस्था की गई है। एएसआई दून सर्किल (कुमाऊं मंडल इसी के अधीन) के अधीक्षण पुरातत्वविद् वसंत स्वर्णकार के अनुसार डॉक्यूमेंट्री का ट्रायल रन हो चुका है।

डॉक्यूमेंट्री के साथ ही एएसआई की ओर से तैयार किए गए मोबाइल ऐप को भी पर्यटन मंत्री ने सर्किट हाउस में लांच किया। इस मोबाइल ऐप पर एएसआई की ओर से संरक्षित किए जा रहे सभी स्मारकों के संबंध में जानकारी पर्यटकों को एक क्लिक पर मिल जाएगी।

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ऑनलाइन तो एंड्रॉयड फोन पर यह ऐप पहले से उपलब्ध है। करीब एक लाख रुपये में इस ऐप को दिल्ली से खास तौर पर तैयार कराया गया है। इसमें विभिन्न स्मारकों के इतिहास, प्रमुख स्थानों से दूरी, स्थिति आदि सभी पहलुओं के बारे में एक नजर में जाना जा सकता है।

उत्तराखंड में एएसआई के संरक्षणाधीन मंदिरों का साइट मैनेजमेंट प्लान भी तैयार किया जा रहा है। इसके लिए जिलों में प्रशासन से बातचीत हो रही है। परिसरों को इस प्लान के मुताबिक ही विकसित किया जाएगा। इस साल जून तक इस प्लान के अंतिम रूप लेने की संभावना है।