2जी मामले में ‘ईमानदार’ मनमोहन सिंह ने दी थी धमकी, ‘साथ दो या भुगतो’

2जी घोटाले में आखिरकार ‘ईमानदार’ पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के नाम का भी खुलासा हो गया है। 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले के समय टेलीकॉम रेग्यूलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया (TRAI) के अध्यक्ष रहे प्रदीप बैजल का दावा है कि उन्होंने अरबों रुपये के टेलीकॉम घोटाले की शुरुआत के बारे में मनमोहन सिंह को जानकारी दी थी। बैजल का आरोप है कि प्रधानमंत्री ने उस समय उनसे कहा था कि, ‘सरकार की नीतियों का साथ दो नहीं तो नुकसान में रहोगे…’

बैजल ने अपनी एक किताब में इस वाकये का खुलासा किया है।

बैजल ने अपनी नई किताब में लिखा है कि 2जी मामले में तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने मुझसे कहा था कि मेरी सरकार के मंत्रियों का सहयोग करो या नुकसान झेलने के लिए तैयार रहो। बैजल ने अपनी किताब में आगे लिखा है कि मेरे जैसे अधिकारियों की हालत उस समय ऐसी हो गई थी कि कुछ करो तो अपराध, नहीं करो तो भी अपराध। 2जी मामले में गड़बड़ी को लेकर जब मैंने कार्रवाई करनी चाही, तो यूपीए सरकार की तरफ से मुझे कई बार झूठे आरोपों में फंसाने की धमकी मिली। पूर्व दूरसंचार मंत्री दयानिधि मारन के साथ मनमोहन सिंह भी 2जी घोटाले के लिए जिम्मेदार हैं।

2जी घोटाला वर्ष 2010 में तब सामने आया था, जब सीएजी ने अपनी एक रिपोर्ट में साल 2008 में किए गए स्पेक्ट्रम आवंटन पर सवाल खड़े कर दिए थे। 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले में कंपनियों को नीलामी की बजाय ‘पहले आओ और पहले पाओ’ की नीति पर लाइसेंस दिए गए थे, जिसमें भारत के महालेखाकार और नियंत्रक (कैग) के अनुसार सरकारी खजाने को एक लाख 76 हजार करोड़ रुपये का नुकसान हुआ था।

बैजल का आरोप है कि पूर्व टेलिकॉम मिनिस्टर दयानिधि मारन ने कहा था कि वे टेलिकॉम के प्रधानमंत्री हैं और इसके सभी निर्णय उनके द्वारा लिए जाएंगे। बैजल ने लिखा है कि पूर्व मंत्री ने उन्हें 2जी केस में सहयोग नहीं करने पर नुकसान झेलने की चेतावनी दी। पीएम मनमोहन सिंह ने उनसे कहा था कि केस में सरकार और मंत्रियों का पूरा सहयोग करो। बैजल ने 2जी केस में उन्हें फंसाने के लिए सीबीआई पर भी आरोप लगाया है।

2जी टेलिकॉम घोटाले में पूर्व ट्राई चेयरमैन प्रदीप बैजल पर भी घोटाले का आरोप है। यूपीए-2 सरकार में उन्हें भ्रष्टाचार के मामलों में क्लीन चिट देकर दोबारा महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई थी। अब बैजल ने किताब लिखकर घोटाले से जुड़ी नई बातें सबके सामने रखी हैं। 2002 में उन पर एक होटल के खरीद-फरोख्त को लेकर गड़बड़ी का आरोप भी लगा था।

बैजल ने एक निजी टेवी चैनल को बताया कि उनकी पहले ‘आओ पहले पाओ’ की नीति को खत्म करने के सुझाव को दरकिनार कर दिया गया था। बैजल ने ट्राई के प्रमुख के तौर पर 2006 तक यह जिम्मेदारी निभाई थी। सीबीआई ने 2जी घोटाले के संबंध में बैजल से भी पूछताछ की है।

2009 में ए. राजा टेलीकॉम मंत्री बने। अब उन पर 2जी घोटाले के मामले में केस चल रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि मनमोहन सिंह सरकार के दौरान सीबीआई ने उन पर दबाव बनाया था कि वह अरुण शौरी पर भी आरोप लगा दें। एनडीए की सरकार में शौरी के पास टेलीकॉम का मंत्रालय था और 2004 में चुनाव में हार के बाद यूपीए सरकार में आई थी।

बैजल का यह भी दावा है कि 2004 में जब प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने दयानिधि मारन को टेलीकॉम मंत्री के रूप में चुना था, तब भी उन्होंने पीएम को बताया था कि इससे हितों के टकराव का मामला बनेगा। बैजल का दावा है कि मारन ने उन्हें सरेआम धमकी दी कि ‘पहले आओ पहले पाओ’ की नीति को खत्म करने की किसी पहल का उन्हें खामियाजा भुगतना पड़ेगा।

बैजल ने बताया कि मनमोहन सिंह ने उन्हें साफ कहा था कि डीएमके नेता को किसी तरह की दिक्कत न हो क्योंकि वह सरकार का अहम हिस्सा थे।