स्कंद पुराण में कैलाश मानसरोवर यात्रा के इस रूट का है उल्लेख, 57 साल से ठगे जा रहे हैं श्रद्धालु

पड़ोसी देश चीन के साथ समझौते के बाद इस बार कैलाश-मानसरोवर यात्रा के एक नए रास्ते (नाथूला दर्रा) से शुरू होने जा रहा है। उत्तराखंड के कुमाऊं अंचल में पुराने रास्ते के अलावा जून से शुरू होने वाली यह यात्रा पहली बार नाथूला दर्रे से भी आगे बढ़ेगी, लेकिन चंपावत के रास्ते जाने वाली कैलाश यात्रा का रास्ता लंबे अरसे से बंद है।

चंपावत से जाने वाला यह रास्ता खुलता तो जिले के लोगों को भी फायदा होता और यात्रियों को कई पौराणिक मंदिरों के दर्शन करने का सौभाग्य प्राप्त होता। कैलाश यात्रा का हिस्सा रहे इस चंपावत यात्रापथ का उल्लेख तो स्कंद पुराण में भी मिलता है।

इतिहासकार महाविद्यालय के रिटायर्ड प्राचार्य मदन चंद्र भट्ट बताते हैं कि कैलाश-मानसरोवर यात्रा का तत्कालीन चंद राजाओं की राजधानी रहे चंपावत से गहरा संबंध रहा है। यात्री यहां के बालेश्वर और मानेश्वर महादेव मंदिर में दर्शन करके आगे बढ़ते थे।

इसका स्कंद पुराण में मानसखंड के 11वें अध्याय में उल्लेख है। इसमें मानस यात्रा प्रवेश निर्गम में चंपावत का उल्लेख मिलता है। मानसरोवर का मुख्य मार्ग बालेश्वर, मानेश्वर और रामेश्वर के मंदिरों से होकर गुजरना बताया गया है।

1962 से तक इस यात्रा का चंपावत एक अहम पड़ाव था। युद्ध के बाद दो दशक तक यात्रा बंद रही। 1981 में यात्रा की दोबारा शुरुआत के बाद इसका जिम्मा कुमाऊं मंडल विकास निगम को सौंपने के साथ ही यात्रा मार्ग बदल कर अल्मोड़ा होते हुए कर दिया गया।

यात्रा में 13 बार ड्यूटी कर चुके केएमवीएन के साहसिक पर्यटन प्रभारी दिनेश गुरुरानी बताते हैं कि 1958 तक इस यात्रा का रूट चंपावत से गुजरता था। उस समय रूट बदलने की दलील के रूप में कहा गया था कि बरसात में रोड बंद हो जाता है। जिला पर्यटन अधिकारी एसएस यादव का कहते हैं कि फिलहाल रूट बदलकर चंपावत से कराए जाने का कोई प्रस्ताव नहीं भेजा गया है।

1962 के बाद चंपावत रूट से यात्रा की आवाजाही कभी नहीं हुई, लेकिन इसके बाद एक बार इस मार्ग से वापसी जरूर हुई। विदेश मंत्रालय ने 2002 में यात्रा की वापसी यहीं से तय की, लेकिन एक साल बाद ही वापसी के इस मार्ग को भी भी हटा दिया गया।

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यात्रा का रूट मानसखंड के मुताबिक नहीं होना धार्मिक मान्यता पर भी सवाल उठाता है। इससे मां पूर्णागिरि धाम सहित चंपावत जिले के तीर्थस्थलों को पहचान के लिए तरसना पड़ता है।

हिंदू जागरण मंच के प्रदेश अध्यक्ष चंद्र किशोर बोहरा कहते हैं, इस धार्मिक यात्रा के रूट को पौराणिक ग्रंथ मानसखंड के अनुरूप कराने के लिए हिंदूवादी सगठन सामूहिक पहल करेंगे। इसके लिए भारत सरकार को अनुरोध पत्र भेजकर इसकी शुरुआत की जाएगी।

चंपावत के विधायक हेमेश खर्कवाल कहते हैं, कैलाश-मानसरोवर यात्रा का चंपावत पौराणिक मार्ग रहा है। इस पुरातन मार्ग को शुरू करवाने के लिए राज्य सरकार के माध्यम से प्रस्ताव भारत सरकार को भिजवाया जाएगा।