आग से निपटने के लिए वन विभाग ने की अधिकारियों की छुट्टियों में कटौती

नैनीताल।… गर्मी के सीजन के दौरान वनाग्नि की घटनाओं में कमी लाने के लिए उत्तराखंड वन विभाग ने अधिकारियों की छुट्टियों में कटौती करने जैसे कई उपाय अमल में लाने का निर्णय किया है।

कुमांऊं क्षेत्र के मुख्य वन संरक्षक डॉ राजेंद्र बिष्ट ने बताया, ‘जंगलों में लगने वाली आग की घटनाओं में कमी लाने के लिए विभाग वन अधिकारियों की छुट्टियों को सीमित करेगा तथा आसपास रहने वाले लोगों के बीच जागरुकता अभियान भी चलाएगा। इससे वे ऐसी घटनाओं की सूचना तुरंत वन विभाग के नियंत्रण कक्ष तथा राज्य के आपातकालीन सेवा 108 को दें।’

उन्होंने कहा, ‘वन विभाग के कर्मचारियों और अधिकारियों के गर्मी के सीजन के दौरान छुट्टी के आवेदनों की समीक्षा की जा रही है और असाधारण परिस्थितियों के अलावा, छुट्टी के आवेदनों पर विचार नहीं किया जाएगा।’ उन्होंने कहा कि जंगलों में आग लगने की घटनाएं मुख्यत: गर्मी के सीजन में लगभग 15 जून तक मानसून आने से पहले ही ज्यादा होती हैं।

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बिष्ट ने कहा कि वनाग्नि की घटनाओं से बचाव और उसके प्रबंधन में सामुदायिक भागीदारी बहुत महत्वपूर्ण होती है और उसके अनुसार, वन विभाग ने उनका सहयोग लेने के मकसद से ग्राम स्तरीय समितियों का गठन कर दिया है।

उन्होंने बताया कि गर्मियों के दौरान जंगली जानवरों के लिए पानी की कमी के मद्देनजर वनाग्नि की घटनाएं होने की स्थिति में जिम कार्बेट नेशनल पार्क सहित सभी जरूरी जगहों पर पानी के तालाब बना दिए गये हैं। अब तक इस सीजन में कुमाऊं क्षेत्र में संरक्षित वन क्षेत्र में वनाग्नि की चार तथा सिविल सोयम वन क्षेत्र में वनाग्नि की दो घटनाएं हुई हैं, जिनमें सात हेक्टेयर वन क्षेत्र प्रभावित हुआ है।