आखिर संत समाज पीएम मोदी से इतना नाराज क्यों है कि…

एक तरफ केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार अपने एक साल के कामों का बखान करते नहीं थक रही और दूसरी ओर विपक्ष से लेकर साधु-संत तक सरकार की निंदा करने में लगे हुए हैं। धार्मिक नगरी हरिद्वार में मार्गदर्शक मंडल बैठक में देशभर से आए साधु-संतों ने केंद्र सरकार पर जमकर निशाना साधा। जूना पीठाधीश्वर अवधेशानंद गिरि ने कहा कि जब तक गंगोत्री से निकला जल उसी रूप में गंगा सागर में नहीं पहुंचता, तब तक नमामि गंगे योजना सफल नहीं हो पाएगी।

उधर वयोवृद्ध संत एवं पद्मभूषण स्वामी सत्यमित्रानंद गिरि ने कहा कि 50 मोदी मिलकर भी देश को भ्रष्टाचार मुक्त नहीं कर सकते। उन्होंने राजनैतिक दलों द्वारा चंदा लेने को भ्रष्टाचार का मुख्य कारण बताया। स्वामी सत्यमित्रानंद गिरि ने कहा कि संतों को विष पीने और अमृत बांटने का अधिकार दिया गया है, लेकिन देश का 85 प्रतिशत हिंदू यह महसूस करे कि उसका कोई संरक्षक नहीं तो यह दुर्भाग्य की बात है।

पूर्व केंद्रीय गृह राज्यमंत्री चिन्मयानंद सरस्वती ने कहा कि गंगा की गहराई लगातार कम हो रही है। प्रधानमंत्री से संतों को बड़ी आशा है, पर सरकार के मंथन में जो निकला, वह बताया क्यों नहीं जाता। स्वामी दयानंद दास ने कहा कि ऋषिकेश में राफ्टिंग तत्काल बंद होनी चाहिए। यह राफ्टिंग गंगा के साथ शराबियों का खिलवाड़ है।

साध्वी प्रज्ञा, साध्वी मैत्रेयी, अध्यक्ष विशोकानंद आदि ने भी विचार रखे। प्रवीण तोगड़िया ने मांग की है कि भारत सरकार गो-हत्या बंदी का कानून लाए।