स्वामी शिवानंद ‘गंगा मां’ के लिए जान देने को भी तैयार

हरिद्वार। पतित पावनी गंगा में हो रहे अवैध खनन को लेकर मातृसदन के प्रमुख स्वामी शिवानन्द बेहद नाराज है। अवैध खनन के विरोध में वह निर्जल अनशन पर बैठ गए हैं। उनका कहना है कि वह गंगा को बचाने के लिए अपने प्राण तक त्याग देंगे। पिछले 44दिनों से अन्न रहित तपस्या पर चले आ रहे स्वामी शिवानन्द ने 22 मई से अपनी तपस्या को कठोर करते हुए जल का भी त्याग कर दिया है।

गौरतलब है कि 19 अप्रैल को प्रशासन ने नदी तलों में उपखनिज जमा होने और इससे मानसून अवधि में बाढ़ के खतरे की आशंका जताते हुए उपखनिज उठाने की अनुमति दी थी। भारी मशीनों के जरिए यह काम शुरू भी हो गया। हालांकि, मातृसदन के मुताबिक यह अवैध खनन है जिसका विरोध जरूरी है।

स्वामी शिवानन्द का कहना है कि प्रशासन और शासन खनन को लेकर बेशर्म हो चुका है। खनन माफियाओं को लाभ पहुंचाने पर आमादा सरकार गंगा की छाती को पोकलैंड और जेसीबी से रौंद रही है और वह गंगा की ऐसी दुर्दशा नहीं देख सकते। उन्होंने कहा,‘अब मैं गंगा के लिए प्राण त्यागने का निश्चय कर चुका हूं।’

जब जिला अस्पताल के डॉक्टरों की टीम पुलिस के साथ उनके स्वास्थ्य की जांच करन के लिए पहुंची तो उन्होंने जांच कराने से इनकार कर दिया। उन्होंने स्पष्ट कहा, ‘मैं स्वामी निगमानन्द के हत्यारे अस्पताल के डाक्टरों से अपना स्वास्थ्य परिक्षण नहीं करवाना चाहता।’

स्वामी शिवानन्द के शिष्य ब्रह्मचारी दयानन्द ने बताया कि स्वामी जी को दो दिन बिना जल ग्रहण किए बीत गए हैं,  लेकिन गंगा के सीने पर सरकारी आदेशों से चलने वाले बुलडोजर निर्बाध गति से चल रहे हैं।