चंपावत में बनेगा हेलीपेड, एक साथ उतर पाएंगे तीन हेलीकॉप्टर

उत्तराखंड के पूर्वी जिले चंपावत में हेलीपेड का सपना अगले कुछ सालों में हकीकत में बदल जाएगा। चंपावत में हेलीपेड के प्रस्ताव को अंतिम रूप से मंजूरी मिलने के बाद टेंडरिंग प्रक्रिया भी पूरी की जा चुकी है। अब जल्द ही सर्किट हाउस के नजदीक सेलाखोला गांव में हेलीपेड का निर्माण शुरू हो जाएगा।

यहां बन रहे हेलीपेड में दो चौपड़ और 1 एम-17 जहाज तीनों एक साथ उतर सकेंगे। इस हेलीपेड का उपयोग आने वाले समय में आपदा से लेकर वीआईपी मूवमेंट और अन्य गतिविधियों तक में होगा।

सर्किट हाउस से करीब 400 मीटर दूर वाली 0.20 हेक्टेयर जमीन को भूगर्भीय परीक्षण के बाद हेलीपेड के लिए नागरिक उड्डयन निदेशालय ने उपयुक्त मानते हुए 2011 में हरी झंडी दी थी। डीएम दीपेंद्र कुमार चौधरी ने बताया कि उत्तराखंड इमरजेंसी एसिस्टेंस प्रोजेक्ट (यूईएपी) के तहत इस परियोजना को अंतिम रूप से स्वीकृति मिल चुकी है। टेंडरिंग प्रक्रिया भी पूरी हो चुकी है। अब एक महीने के भीतर काम शुरू हो जाएगा।

चंपावत जिले में तीन अन्य हेलीपेड भी प्रस्तावित किए गए हैं। जिलाधिकारी दीपेंद्र कुमार चौधरी ने बताया कि लोहाघाट तहसील में डैसली, पाटी तहसील में देवीधुरा और श्रीपूर्णागिरि (टनकपुर) तहसील में बनबसा में हेलीपेड प्रस्तावित किए गए हैं। आपदा के अलावा ह्यूमन ट्रैफ्किंग, तस्करी, माओवाद के खतरों के मद्देनजर इन हेलीपेडों को प्रस्तावित किया गया है।

हेलीपेड नहीं होने से जिले में कई तरह की दिक्कतें होती हैं। राष्ट्रीय राजमार्ग बंद होने और आपदा के वक्त ये हेलीपेड मददगार होगा। साथ ही वीआईपी (विशिष्ट मेहमानों) के आने पर भी दिक्कत होती है। जिले में किसी महत्वपूर्ण अतिथि के आने पर हेलीपेड को कामचलाऊ तौर पर खेल मैदान में बनाना पड़ता है। बीते पांच सालों में जिले में आए 17 वीआईपी के लिए गोरलचौड़ सहित अन्य खेल मैदानों को अस्थाई हेलीपेड का रूप देना पड़ा है। इससे न केवल खेल गतिविधियों पर ब्रेक लग रहा है बल्कि मैदान भी बिगड़ता है।