कैबिनेट के निर्णयों को प्राथमिकता के आधार पर लागू किया जाए : हरीश रावत

मुख्यमंत्री हरीश रावत के पिछले साल एक फरवरी को उत्तराखंड की कमान संभालने के बाद से अब तक हुई 26 कैबिनेट बैठकों में लिए गए 433 निर्णयों में से 380 के शासनादेश जारी कर दिए गए हैं। 17 अन्य मामले उप-समितियों को सौपे गए हैं, जिनकी रिपोर्ट आनी शेष है।

देहरादून में जारी एक सरकारी विज्ञप्ति के अनुसार, वर्ष 2014 से अब तक हुई कैबिनेट बैठक में लिए गए निर्णयों के क्रियान्वयन और बजट भाषण में शामिल नई योजनाओं के लिए बजट व्यवस्था के संबंध में बुधवार शाम समीक्षा के दौरान मुख्यमंत्री रावत ने कहा कि कैबिनेट में लिए जाने वाले फैसलों का पालन प्राथमिकता के आधार पर होना चाहिए और केवल शासनादेश जारी करने को ही अनुपालन न समझा जाए।

उन्होंने कहा कि अधिकारी सुनिश्चित करें कि शासनादेशों का सही ढंग से अनुपालन हो और उनका लाभ संबंधित व्यक्ति तक पहुंचे।

इस संबंध में मुख्यमंत्री ने कहा कि सभी सचिव और विभागाध्यक्ष मुख्य सचिव को निर्धारित प्रारूप पर एक रिपोर्ट सौंपें कि अब तक हुई कैबिनेट बैठकों में लिए गए निर्णयों की क्या स्थिति है, कितनों के शासनादेश जारी हो गए हैं, कितनों का अनुपालन हो रहा है और कितनों के शासनादेश अभी तक जारी नहीं हुए हैं।

उन्होंने कहा कि जिन निर्णयों के शासनादेश जारी नही हुए हैं, उनका कारण भी बताया जाए। उन्होंने कहा कि कैबिनेट में लिए गए निर्णयों का अनुपालन त्वरित गति से होना चाहिए और यदि किसी निर्णय को लागू करने में कोई कठिनाई है, तो उसके लिए उच्चाधिकारियों से विचार-विमर्श कर उसका समाधान निकाला जाए।

रावत ने कहा कि योजना के अनुपालन में कोई व्यावहारिक कठिनाई आ रही है तो कारण बताया जाए या उसके समाधान के लिए सुझाव दिए जाएं। उन्होंने कहा, कैबिनेट द्वारा उप-समितियों को सौपे गए निर्णयों की रिपोर्ट जल्द तैयार की जाए, जिसे अगली कैबिनेट बैठक में रखा जाए। उन्होंने कहा कि जारी होने वाले शासनादेशों का सचिव और विभागाध्यक्ष नियमित रूप से अनुश्रवण करें। मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसे लंबित मामले जिन पर शासनादेश जारी होने हैं, उन पर त्वरित कार्यवाही करते हुए आगामी एक माह में निश्चित रूप से कोई न कोई निर्णय अवश्य ले लिया जाए।

मुख्यमंत्री के सामने 63 ऐसे मामलों पर भी चर्चा की गई, जो विभागीय स्तर पर लंबित थे। चर्चा के बाद कुछ मामलों का समाधान भी निकाला गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि इन सभी बिन्दुओं के शासनादेश शीघ्र ही जारी कर दिए जाएंगे।

रावत ने कहा कि बजट भाषण में जिन विभागों में नई योजनाएं शुरू की गई हैं, उनके लिए बजट धनराशि की पर्याप्त व्यवस्था की जाए। उन्होंने कहा कि किसी भी योजना के क्रियान्वयन में धन की कमी आड़े नहीं आने दी जाएगी और यदि किसी योजना के लिए धनराशि कम पड़ रही हो, तो उसे अनुपूरक बजट में रखा जाए।

मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि भूमि संबंधी प्रकरणों के शीघ्र निस्तारण के लिए अलग से नीति बनाई जाए। उन्होंने कहा कि शिक्षा आयोग के गठन का निर्णय कैबिनेट में लिया जा चुका है, लेकिन अभी तक इसके गठन की कार्यवाही नहीं की गई है। उन्होंने निर्देश दिए कि उच्च शिक्षा आयोग का शीघ्र गठन किया जाए।