अयोध्या में राम मंदिर के पास नहीं बन सकती मस्जिद : शंकराचार्य

दो पीठों के शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती का कहना है कि अयोध्या में प्रस्तावित राम मंदिर के पास कोई मस्जिद नहीं बन सकती। उन्होंने कहा, वहां गिराया गया ढांचा मस्जिद नहीं था। एक बार फिर उन्होंने साईं पूजा को सनातन धर्म के विरुद्ध बताया।

स्वामी स्वरूपानंद ने समाज से आग्रह किया कि वे नकली शंकराचार्यों का बहिष्कार करें। उन्होंने हिंदुओं का दृष्टिकोण समझने वाला नया फिल्म सेंसर बोर्ड बनाने का भी सुझाव दिया है। रास्ते में जाम के कारण देर शाम हरिद्वार पहुंचे शंकराचार्य ने अपने कनखल स्थित शंकराचार्य मठ में पत्रकारों से बातचीत में ये सब बातें कहीं।

शंकराचार्य ने कहा कि अयोध्या में तोड़ा गया ढांचा मस्जिद नहीं था, अत: मस्जिद निर्माण का सवाल उठाना गलत है। अयोध्या से बाहर कहीं भी मस्जिद बनाई जा सकती है। नए मंदिर का निर्माण सनातन धर्म की पद्धति के आधार पर होना चाहिए। उन्होंने कहा कि बहुत सी फिल्मों से हिंदू समाज आहत हुआ है। एक ऐसा सेंसर बोर्ड बनना चाहिए, जो प्रत्येक फिल्म को हिंदुओं के दृष्टि से देखकर पास करे।

यही नहीं शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती ने तो यहां तक कहा कि विश्व प्रसिद्ध ताजमहल भी पहले हिंदू मंदिर हो सकता है। इस बारे में तथ्य जुटाए जाने चाहिए। वास्तव में ताजमहल की बनावट अपनी कहानी स्वयं कह रही है। जिस तरह से तीन मंजिल नीचे कब्रें बनाईं गईं हैं, वैसा अन्य कोई उदाहरण भी नहीं मिलता।

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कब्रें जमीन पर बनाई जाती हैं, तीन मंजिल नीचे जमीन के भीतर नहीं। संभव है किसी हिंदू मंदिर को हटाकर कब्र बनाई गई हो। उन्होंने आशंका जताई कि मुस्लिम शासक देश में ऐसा और भी जगह कर सकते हैं। हालांकि मक्का में शिव मंदिर होने के सवाल पर शंकराचार्य ने गोलमोल जवाब दिया। उन्होंने कहा, न्यायालय में वाद दायर होना चाहिए।

गीता-रामायण जैसे धर्म ग्रंथों को पढ़ाए जाने का समर्थन करते हुए उन्होंने साईं पूजा का भी विरोध किया। कहा कि हिंदुओं को साईं मंदिरों में बिल्कुल नहीं जाना चाहिए। जो ऐसा कर रहे हैं, वे सनातन धर्म के खिलाफ आचरण कर रहे हैं। उन्होंने भारत सरकार से गोहत्या बंद कराने की मांग भी की।

शंकराचार्य ने कहा कि हाल के भूकंप से साबित हो गया है कि टिहरी बांध मानवता के लिए खतरा है। गंगा, अलकनंदा आदि पवित्र नदियों पर अब और कोई नया बांध नहीं बनना चाहिए।