उत्तराखंड की ‘राजधानी’ गैरसैंण में एक हफ्ते चलेगा विधानसभा सत्र

विधानसभा सत्र कम से कम सौ दिन चलाने की राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी की नसीहत पर अमल प्रस्तावित राजधानी गैरसैंण से होगा। इसे राष्ट्रपति के भाषण का ही असर कहा जाएगा कि गैरसैंण में अब सत्र एक-दो दिन का नहीं बल्कि पूरे सात दिन का होगा और वह भी छुट्टियां अलग करके।

राज्य में अभी तक सिर्फ बजट सत्र ही इतना लंबा खिंचता रहा है। साथ ही यह बहस भी उठने लगी है कि गैरसैंण ग्रीष्मकालीन राजधानी होगी या स्थायी। अब राज्य सरकार को टेंशन यह है कि गैरसैंण पर गुप्त एजेंडे की बजाय उसे खुलकर काम करना पड़ सकता है।

सोमवार को विधानसभा में भाषण के दौरान राष्ट्रपति ने संसदीय ज्ञान का मर्म सामने रखते हुए कहा था कि सदन कम से कम 100 दिन चले। इससे पहले केरल, हिमाचल, उत्तर प्रदेश और मेघालय में भी राष्ट्रपति ने इसी बात पर जोर दिया था। लेकिन, उत्तराखंड में गैरसैंण का जिक्र कर राष्ट्रपति ने मामले को नया मोड़ दे दिया।

राष्ट्रपति के संबोधन से पहले ही यह तय हो चुका था कि गैरसैंण में सितंबर में विधानसभा सत्र होगा। राष्ट्रपति के दौरे के बाद इसमें यह भी जुड़ गया कि सत्र कम से कम सात दिन का होगा। इससे अलग राष्ट्रपति ने गैरसैंण के साथ ग्रीष्मकालीन राजधानी का जिक्र कर राज्य सरकार की परेशानी बढ़ा दी है।

राज्य में फिलहाल स्थायी राजधानी का मुद्दा सबसे अहम है। लिहाजा एक साथ परस्पर विरोधी फैसले भी हो रहे हैं। गैरसैंण में राजधानी जैसी सुविधाएं जुटाई जा रही हैं पर देहरादून में भी विधानभवन तैयार करने का फैसला लिया गया है। राष्ट्रपति कह गए हैं तो अब प्रदेश सरकार को अपना रुख साफ भी करना पड़ सकता है।

राष्ट्रपति ने अपने संबोधन में कहा, मुझे यह जानकर खुशी हो रही है कि राज्य सरकार चमोली जिले में स्थित गैरसैंण को ग्रीष्मकालीन राजधानी बनाना चाहती है तथा नए विधान भवन का निर्माण कार्य प्रारंभ हो चुका है।

मुख्यमंत्री हरीश रावत का कहना है कि राष्ट्रपति ने जो कहा वह हमारे सिर माथे। पर तथ्य यह भी है कि प्रदेश सरकार गैरसैंण में राजधानी के समान सुविधाएं विकसित करने में कोई कसर नहीं छोड़ रही है। इतना तय है कि गैरसैंण पर कोई भी फैसला सभी की सलाह से ही किया जाएगा।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष किशोर उपाध्याय ने कहा, देश के प्रथम नागरिक के रूप में राष्ट्रपति ने सदन में गैरसैंण का जिक्र किया, यह हमारे लिए बड़ी बात है। मेरी व्यक्तिगत राय यही है कि गैरसैंण को स्थायी राजधानी ही बनाना चाहिए। हम तैयारी इसी की तो कर रहे हैं। पर अभी तय नहीं है कि गैरसैंण ग्रीष्मकालीन राजधानी है या स्थायी राजधानी।