देहरादून।… नेपाल में आए ताजा भूकंप के चलते उत्तराखंड में अपनी बुकिंग रद्द करवाने की सोच रहे तीर्थयात्रियों और पर्यटकों की चिंताओं को राज्य सरकार ने खारिज कर दिया है। राज्य के पर्यटन मंत्री दिनेश धनै ने बुधवार को कहा कि चारधाम यात्रा सहित सभी पर्यटक स्थान सुरक्षित हैं और बिना किसी संकोच या घबराहट के यहां की यात्रा की जा सकती है।

देहरादून में एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए धनै ने कहा कि नेपाल में मंगलवार को आए ताजा भूकंप के झटकों से देश भर से आने वाले तीर्थयात्रियों और पर्यटकों में अपनी उत्तराखंड यात्रा को लेकर संशय की स्थिति पैदा हो गई है।

उन्होंने कहा, सरकार के पास इस संबंध में पूछताछ के लिए कई फोन आए हैं। ऐसे प्राइवेट टूर आपरेटर्स ने तीर्थयात्रियों और पर्यटकों की उत्तराखंड के लिए बुकिंग की है, वे भी यह जानना चाहते हैं कि इस समय राज्य की यात्रा सुरक्षित है या नहीं अन्यथा लोग अपनी बुकिंग रद्द करवा दें।

मंत्री ने कहा, चारधाम यात्रा तथा प्रदेश के अन्य सभी स्थल पूरी तरह सुरक्षित हैं और कहीं किसी प्रकार की समस्या नहीं है। तीर्थयात्री और पर्यटक राज्य में कहीं भी, किसी भी जगह बिना संकोच और घबराहट के आराम से आ सकते हैं।

यह पूछे जाने पर कि क्या भूकंप या अन्य किसी प्राकृतिक आपदा का सामना करने के लिए राज्य सरकार की पूरी तैयारी है, धनै ने कहा कि प्रदेश में राज्य आपदा रिस्पांस फोर्स के अलावा आपदा न्यूनीकरण और प्रबंधन तंत्र है और उन्हें किसी भी अप्रिय स्थिति में लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने के निर्देश दिए गए हैं।

गत 21 अप्रैल को शुरू हुई चारधाम यात्रा के अब तक के आंकड़ों को उत्साहजनक बताते हुए धनै ने कहा कि प्रदेश में गत 11 मई तक कुल 1,15,162 तीर्थयात्री बद्रीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री के दर्शन कर चुके हैं। मंत्री ने कहा कि चारधाम यात्रा रूटों पर पूरी व्यवस्था है और केदारनाथ धाम की यात्रा के लिए पैदल मार्ग के अलावा हवाई सेवा भी शुरू कर दी गई है।

उन्होंने बताया कि रुद्रप्रयाग जिले में फाटा और गुप्तकाशी सहित 10 स्थलों से केदारनाथ तक हैलीकाप्टर सेवा भी उपलब्ध है जिसका प्रति व्यक्ति किराया 7000 रुपये रखा गया है। उन्होंने कहा कि चारधामों के अतिरिक्त गढ़वाल के पांचवें धाम हेमकुंड साहिब की यात्रा भी आगामी एक जून को शुरू हो रही है, जिसके लिए गोविंदघाट से लेकर गुरुद्वारे तक के रास्ते में जमी बर्फ को काटने का काम शुरू कर दिया गया है। उन्होंने उम्मीद जतायी कि 17-18 मई तक रास्ते को पूरी तरह साफ कर दिया जाएगा।

धनै ने कहा कि 31 मई को हेमकुंड साहिब यात्रियों का पहला जत्था गोविंदघाट से रवाना होगा और उसे हरी झंडी दिखाने के लिए स्वयं मुख्यमंत्री हरीश रावत वहां पहुंचेंगे। उन्होंने बताया कि हेमकुंड साहिब की यात्रा करने वाले श्रद्धालुओं के लिए गोविंदघाट से घांघरिया तक के लिए हैलीकॉप्टर सेवा उपलब्ध कराई जाएगी।

मंत्री के साथ मौजूद पर्यटन सचिव उमाकांत पंवार ने कहा कि पिछले साल 2014 में पूरे यात्रा सीजन में केवल ढाई लाख श्रद्धालु ही चारधामों में पहुंचे थे। उन्होंने उम्मीद जतायी कि वर्ष 2013 में आयी आपदा से पहले आते रहे श्रद्धालुओं की संख्या का कम से कम 60-70 फीसदी आंकडा इस साल हासिल हो जाएगा।