यहां सिर्फ एक छात्रा के लिए हैं दो टीचर और एक भोजना माता

रुद्रप्रयाग जिले में एक सरकारी स्कूल है। इस स्कूल का नाम है राजकीय जूनियर हाईस्कूल भटवाड़ीसैंण, रुद्रप्रयाग। लेकिन असल में ये सोनम जगवाण का स्कूल है। क्योंकि सोनम इस स्कूल की इकलौती छात्रा है और उसे पढ़ाने वाले दो अध्यापक हैं।

रुद्रप्रयाग जिला मुख्यालय से मात्र तीन किलोमीटर और रुद्रप्रयाग तहसील मुख्यालय से मश्किल से 500 मीटर की दूरी पर स्थित इस स्कूल में पहुंचना बहुत आसान है। फिर भी यहां छात्र नहीं आते और सोनम जगवाण इकलौती छात्रा है। केदारनाथ धाम राजमार्ग पर सड़क से करीब 100 मीटर ऊपर बने इस स्कूल की एकमात्र छात्रा सोनम सातवीं में पढ़ती है।

घर से स्कूल और स्कूल से घर के लिए वह छह किमी पैदल जंगल वाले रास्ते से होकर जाती है। टीचर एमएस बिष्ट बताते हैं कि बेहद विपरीत हालात में भी सोनम पढ़ने में काफी तेज है। उसने छठी कक्षा में 65 फीसदी से ज्यादा नंबर पाए थे। प्रधानाध्यापक आरएल आर्य का कहना है कि मैंने विभाग से किसी ऐसे स्कूल में तबादले का निवेदन किया है जहां बच्चे हों।

इस स्कूल का रास्ता दुर्गम है, जंगलों से गुजरता हुआ। आसपास के इलाकों का करीब छह किलोमीटर दूर तिलवाड़ा कस्बे से ज्यादा वास्ता है। कामकाज हो या फिर दुकान-व्यापार। इसी कारण लोग अपने बच्चों को तिलवाड़ा में खुले स्कूलों-कालेजों में पढ़ाना ज्यादा पसंद करते हैं। पिछले डेढ़ दशक से इस स्कूल में छात्र संख्या घटते-घटते एक तक गिर गई है।

रुद्रप्रयाग के डीईओ बेसिक जेपी यादव ने बताया कि कुछ दिन पहले उन्होंने इस स्कूल का निरीक्षण किया था। बच्चे नहीं होने के कारण सोनम के 8वीं पास करने के बाद स्कूल को बंद कर दिया जाएगा।

स्कूल की इकलौती छात्रा सोनम जगवाण कहती हैं कि उन्होंने अपने गांव के बच्चों से इस स्कूल में पढ़ने चलने को कहा तो उन सबने मना कर दिया। सोनम कहती हैं कि उसे स्कूल में अकेलापन महसूस होता है। लेकिन अगले साल आठवीं की पढ़ाई भी यहीं से करेगी।

स्कूल में 11 साल से बतौर भोजन माता तैनात शांता देवी को जब-जब सोनल स्कूल आती है उसके लिए खाना बनाना पड़ता है। स्कूल बंद होने के फैसले से वह परेशान है। पति की मौत और बेटी की शादी के बाद से वह अकेली है।