नेपाल में मंगलवार को आए भूकंप में कम से कम 68 लोगों की मौत हो गई और भारत में भी 18 लोगों की मौत हो गई। इसके अलावा नेपाल में 150 से ज्यादा लोग घायल भी हुए हैं। पुलिस ने यह जानकारी दी। मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका है। हादसे में दर्जनों इमारतें धराशायी हो गई हैं।

नेपाल में 25 अप्रैल को आए विनाशकारी भूकंप के बाद मंगलवार को दोबारा दो तेज झटके महसूस किए गए। अमेरिकी भूगर्भ सर्वेक्षण (यूएसजीएस) ने कहा है कि रिक्टर पैमाने पर भूकंप की तीव्रता 7.3 मापी गई। इसका केंद्र राजधानी काठमांडू के पूर्वोत्तर में कोडारी था। शुरुआत में कहा गया था कि भूकंप की तीव्रता 7.4 है और इसका केंद्र चीन के झाम में स्थित है।

भूकंप का केंद्र दुनिया की सबसे ऊंची (8,848) चोटी माउंट एवरेस्ट के काफी नजदीक है। भूकंप के पहले झटके की तीव्रता रिक्टर पैमाने पर 5.6 रही। इसका केंद्र नेपाल के कोडारी से 25 किलोमीटर दूर दक्षिणपूर्व में था। दूसरा झटका अपेक्षाकृत ज्यादा तेज था। रिक्टर पैमाने पर इसकी तीव्रता 6.3 मापी गई। इसका केंद्र नेपाल के रामेछाप जिले से 33 किलोमीटर दूर स्थित था।

earthquake2

यूएस ज्योलॉजिकल सर्वे के अनुसार, भूकंप दोपहर 12 बजकर 35 मिनट पर काठमांडो से पूर्व में करीब 83 किलोमीटर की दूरी पर माउंट एवरेस्ट के पास 18.5 किलोमीटर की गहराई पर आया। पहले भूकंप की तीव्रता रिक्टर पैमाने पर 7.4 मापी गई थी, लेकिन बाद में संशोधित तीव्रता 7.3 बताई गई। भूकंप के तगड़े झटके के बाद छह आफ्टरशाक्स भी महसूस किए गए, जिनकी रिक्टर पैमाने पर तीव्रता पांच से अधिक थी।

भूकंप से नेपाल के डोलखा और सिंधुपालचौक जिले प्रभावित हुए। ये दोनों ही पिछले महीने आए भीषण भूकंप से ज्यादा प्रभावित हुए इलाकों में शामिल हैं।

नेपाल के राष्ट्रीय आपात नियंत्रण केंद्र ने कहा, ‘चिकित्सा दल समेत सभी उपलब्ध हेलीकॉप्टरों, एसएसआर टीम को जल्द ही डोलखा और सिंधुपालचौक में इक्ट्ठा किया जाएगा।’ नेपाल में भारतीय वायु सेना के आठ हेलीकॉप्टर भी मौजूद हैं और एक हेलीकॉप्टर ने भूकंप के तुरंत बाद हवाई सर्वेक्षण भी किया।

नेपाल सहित भारत के कई हिस्सों के आए शक्तिशाली भूकंप के मद्देनजर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हालात का जायजा लिया और सभी संबंधित अधिकारियों को जरूरत के अनुसार राहत और बचाव अभियानों के लिए अलर्ट पर रहने के निर्देश दिए।

प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) ने कहा, ‘प्रधानमंत्री ने नेपाल और भारत के कुछ हिस्सों में आए ताजा शक्तिशाली भूकंप के बाद एक उच्च स्तरीय बैठक में हालात का जायजा लिया।’ पीएमओ ने कहा, ‘प्रधानमंत्री ने सभी संबंधित अधिकारियों को जरूरत के अनुसार बचाव एवं राहत अभियान चलाने के लिए अलर्ट रहने का निर्देश दिया।’

earthquake1

7.3 तीव्रता के शक्तिशाली भूकंप का केंद्र नेपाल में था। भूकंप के कारण दिल्ली, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल समेत उत्तर और पूर्वी भारत के कई हिस्से हिल गए जिससे लोगों में डर का माहौल बन गया। भूकंप के झटकों के बाद दिल्ली मेट्रो की सेवा कुछ देर के लिए रोक दी गई। गृहमंत्रालय के मुताबिक, भूकंप से वजह से बिहार में अब तक 16 और यूपी में एक व्यक्ति की मौत हो चुकी है।

कोलकाता में हजारों लोग अपने घर और दफ्तर से बाहर भागते हुए देखे गए। बिहार की राजधानी पटना में लोग अपने घरों से बाहर निकलकर खुले स्थान पर चले गए। इसी तरह की खबरें असम और दूसरे पूर्वी राज्यों से भी हैं। भूकंप के झटके चेन्नई तक महसूस किए गए। भूकंप के बाद दिल्ली सचिवालय के साथ ही कई सरकारी भवनों को तुरंत खाली करा लिया गया।

काठमांडू में भूकंप के झटके महसूस होने के बाद लोग घरों से बाहर निकलकर सड़कों पर आ गए और दुकानदारों ने अपनी दुकानें बंद कर दीं। चीन में भी भूकंप के झटके महसूस किए गए।

नेपाल के एकमात्र हवाई अड्डे त्रिभुवन अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे को अधिकारियों ने कुछ समय के लिए बंद कर दिया और काठमांडू आने वाले विमानों के रास्ते बदल दिए गए। राजधानी काठमांडू में तगड़े झटके से लोग अपने घरों से बाहर निकल आए और कुछ ने चीखना शुरू कर दिया। अधिकारियों ने लोगों से खुले मैदान में रहने की सलाह दी।

आपको बता दें कि 25 अप्रैल को नेपाल में आए 7.9 तीव्रता के विनाशकारी भूकंप को पूरे उत्तर भारत में महसूस किया गया था। इस भूकंप के चलते नेपाल में 8,000 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई और करीब 17,000 घायल हो गए। वहां अब तक भूकंप के करीब 165 झटके महसूस किए जा चुके हैं। इस भूकंप से बिहार, यूपी और पश्चिम बंगाल में भी करीब 80 लोगों की मौत हो गई थी।