बात-बात पर जाम छलकाने के वालों के लिए बुरी खबर, शराब हुई महंगी

गमों को भुलाना हो या खुशी का इजहार करना हो, हर मौके पर जाम छलकाने वालों को अब शराब के लिए और ज्यादा जेब ढीली करनी होगी। वाणिज्य कर विभाग ने देसी और अंग्रेजी शराब पर वैट बढ़ा दिया है।

सरकार ने वैट मुक्त देसी शराब पर सीधे 10 फीसदी वैट लगा दिया, अंग्रेजी शराब पर वैट 15 फीसदी से बढ़ाकर 20 फीसदी कर दिया गया है। इससे वाणिज्य कर महकमे को सालाना 12 से 15 करोड़ तक का अतिरिक्त टैक्स मिलेगा।

राज्यभर में शराब की भारी बिक्री को देखते हुए सरकार ज्यादा से ज्यादा राजस्व जुटाने में लगी है। पहले 15 अप्रैल को नई आबकारी नीति लागू कर 15 से 20 फीसदी तक अंग्रेजी और देसी शराब के दाम बढ़ाए गए थे। दाम बढ़े एक महीना भी नहीं हुआ है और सरकार ने शराब पर वाणिज्य कर बढ़ाने का फैसला कर लिया।

वाणिज्य कर विभाग के वैट बढ़ोतरी आदेश अभी आबकारी विभाग को नहीं मिला है। उम्मीद है मंगलवार को आदेश मिलने के बाद इसे लागू कर दिया जाएगा। वैट के आकलन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही नए बढ़े दामों पर स्थिति साफ होगी।

वाणिज्य कर आयुक्त दिलीप जावलकर ने बताया कि देसी शराब पर वैट लगाया गया है, जबकि अंग्रेजी पर बढ़ाया गया है। आबकारी आयुक्त विनय शंकर पांडे ने बताया कि अभी हमें बढ़े वैट के आदेश नहीं मिले हैं।

वैट की वसूली उत्पाद के बिक्री चरणों पर निर्भर करती है। उपभोक्ता तक उत्पाद पहुंचने के बीच जितने बिक्री चरण होंगे उतने पर वैट देना होगा। इसका सीधा असर वस्तु के मूल्य पर पड़ता है। आबकारी नीति में उत्पादक से उपभोक्ता के बीच बिक्री के चरण इस बार बढ़ा दिए गए हैं।

शराब कंपनी से शुरू होने वाली बिक्री में पहला चरण राज्य मंडी परिषद है जिसे वैट की निर्धारित दर को भरना होगा। परिषद से जीएमवीएन और केएमवीएन शराब खरीदेगा, जिसे वैट देना होगा। आखिर में फुटकर विक्रेता वैट की निर्धारित दर वाणिज्य कर विभाग को देगा इसके बाद उपभोक्ता को शराब की बोतल बेचेगा।