एसएसबी महानिदेशक बंशीधर शर्मा ने खुलासा किया कि पड़ोसी देश नेपाल में आए विनाशकारी भूकंप के कारण लोगों के आर्थिक हालात काफी खराब हो गए हैं। नेपाल से पलायन करने वाली गरीब युवतियों एवं किशोरों को शादी और नौकरी का प्रलोभन देकर मानव तस्कर उन्हें मुंबई जैसे बड़े शहरों में भेजने की फिराक में हैं।

उन्होंने बताया कि एसएसबी ने उत्तर प्रदेश के एक व बिहार बॉर्डर पर चार बच्चों और युवतियों को पकड़कर मानव तस्करी का खुलासा किया है। अमृतपुर और गनियाद्योली सीमांत मुख्यालय की जांच करने आए एसएसबी के महानिदेशक बंशीधर शर्मा ने बताया कि नेपाल में बचाव अभियान बंद हो गया है, लेकिन राहत सामग्री भेजने का काम एसएसबी अब भी कर रही है।

नेपाल में घायल पुलिसकर्मियों और सैनिकों के परिवारों को हरसंभव मदद भेजी जा रही है। शनिवार को बनबसा बॉर्डर से पांच ट्रक खाद्य सामग्री भेजी गई। एसएसबी के परिवार की महिलाओं के संगठन संदीक्षा द्वारा रविवार को राहत सामग्री नेपाल की फोर्स को भेजी गई है।

25 अप्रैल के विनाशकारी भूकंप के बाद नेपाल में पलायन बढ़ गया है। इसका फायदा मानव तस्कर उठाने की कोशिश में लगे हैं, लेकिन एसएसबी ने उत्तर प्रदेश के रक्सौल बॉर्डर, बिहार के बॉर्डर पर कुल पांच बच्चे और युवतियों को पकड़कर पुलिस के हवाले किया है। मानव तस्कर नौकरी दिलाने, शादी करने, धन देने का प्रलोभन देकर युवतियों और किशोरों को गुमराह करने की कोशिश में लगे हैं।

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मानव तस्कर बच्चों को मुंबई भेज रहे हैं। इसी तरह असम और उत्तरी बंगाल के बॉर्डर पर काफी छिपकलियां टाइप (टोके लिजर्ड) पकड़कर एसएसबी ने वन विभाग के सुपुर्द कर दिए हैं। एक छिपकली की कीमत बाजार में 12 लाख रुपये बताई जा रही है। उत्तराखंड के बॉर्डर पर कीड़ा जड़ी बेचने वाले तस्कर सक्रिय हैं। एसएसबी तस्करों के मंसूबे फेल करने के लिए काम कर रही है।

एसएसबी के महानिदेशक ने बताया कि सीमा पर एसएसबी का ‘कन्या पढ़ाओ, कन्या बचाओ’ अभियान भी शीघ्र शुरू होगा। कन्या भ्रूण हत्या जैसे अपराधों के प्रति लोगों को जागरुक किया जाएगा। सीमा पर स्थित पर्यटक स्थलों में पानी की व्यवस्था, झील, झरनों के संरक्षण की भी योजना है।

इंडो-नेपाल सीमा पर शिक्षा की अलख जगाने के लिए एसएसबी ने 309 सरकारी स्कूलों को गोद लिया है। बच्चों को पर्यावरण संरक्षण के लिए पौधरोपण के तरीके, सेना में भर्ती होने के लिए प्रशिक्षण दिया जा रहा है। प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए नौनिहालों को कोचिंग आदि की सुविधा भी दिलाई जा रही है।