कभी तो ‘गांव वापसी’ करो खुद को उन यादों से जोड़ कर

RSS की बुराई के लिए आपको भले ही लाख वजहें मिल जाएंगी, लेकिन इस बात के लिए तो आपको इस सामाजिक-सास्कृतिक संगठन की तारीफ करनी चाहिए कि यह आपको अपनी जड़ों से जोड़ने के लिए, आपको अपने पूर्वजों के गांव और जन्मस्थल पर वापस बुलाने के लिए खास पहल कर रहा है।

राष्ट्रीय स्वंय सेवक संघ ने उत्तराखंड से पलायन कर चुके लोगों को उनकी जड़ों से वापस जोड़ने के लिए ‘मेरा गांव, मेरा तीर्थ’ कार्यक्रम शुरू किया है। इसके तहत संघ ने अपने गांव-घर छोड़ चुके लोगों से अपील की है कि साल में कम से कम एक बार तो वे अपने गांव जरूर आएं।

वो घर जहां कभी बच्चों की किलकारियां गूंजा करती थीं
वो घर जहां कभी शादी-ब्याह की शहनाईयां गूंजा करती थीं,
तुम चले गए अपने बुजुर्गों के उस आंगन को छोड़ कर
कभी तो घर वापसी करो खुद को उनकी यादों से जोड़ कर।

वो आंगन आज सूना है,
तूने शहर में अपना आशियाना बुना है
गांव का वो घर आज टूटा पड़ा है
जहां रहती थी कभी रौनक, आज वो आंगन वीराना पड़ा है।