अगर आप भी उन लोगों में से हैं जो उत्तराखंड में मेट्रो ट्रेन के सुहाने सफर के सपने बुन रहे थे, तो समझिए आपके सपने चकनाचूर हो गए हैं। अगर आप सोच रहे थे कि अस्थायी राजधानी देहरादून से ऋषिकेश और हरिद्वार का रास्ता एक दिन मेट्रो में बैठकर तय करेंगे तो अब उस दिवा स्वप्न को भूल जाइए। क्योंकि MDDA ने मेट्रो प्रोजेक्ट का विचार ही त्याग दिया है।

राज्य की अस्थायी राजधानी देहरादून में एक दूसरे ही प्रोजेक्ट को लेकर मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण (MDDA) ने कवायद तेज कर दी है। गुरुवार को इस संबंध में प्राधिकरण में प्रोजेक्ट के ग्राउंड सर्वे का प्रेजेंटेशन दिया गया। प्रेजेंटेशन में मेट्रो के बजाए देहरादून-हरिद्वार-ऋषिकेश के लिए एलआरटी (लाइट रेल ट्रांजिट) को ज्यादा मुफीद और सही बताया गया। यही नहीं एलआरटी की लागत भी मेट्रो से काफी कम आ रही है।

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एलआरटी ट्रैक को देहरादून से हरिद्वार तक बन रहे फोर लेन हाईवे के बीच वाले खाली जगह यानी डिवाइडर में बनाने की योजना है। यही नहीं यह भी तय किया गया कि पहले फेज में सिर्फ साठ किलोमीटर का ही ट्रैक बनाया जाएगा।

एमडीडीए अधिकारियों का कहना है कि राज्य के तीन बड़े शहरों देहरादून, हरिद्वार और ऋषिकेश को जोड़ने के लिए मेट्रो या मोनो रेल के बजाए एलआरटी (लाइट रेल ट्रांजिट) तकनीक लाई जाएगी। माना जा रहा है कि मेट्रो या मोनो रेल की बजाय एलआरटी लाने पर विचाकर इसलिए किया जा रहा है, क्योंकि इसकी कीमत मोनो रेल से पांच गुना तक कम है।

शुक्रवार को एमडीडीए में उपाध्यक्ष आर. मीनाक्षी सुंदरम और सचिव पीसी दुम्का की मौजूदगी में प्रोजेक्ट के ग्राउंड सर्वे का प्रेजेंटेशन दिया गया। एमडीडीए अधिकारियों के मुताबिक एलआरटी ट्रैक को देहरादून से हरिद्वार तक बन रहे हाईवे के बीच वाले खाली हिस्से में बनाया जाएगा। अधिकारियों के मुताबिक इसमें सहयोग के लिए नेशनल हाईवे अथॉरिटी (एनएचआई) के अधिकारियों को चिट्ठी भेज दी गई है।

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भानियावाला से ऋषिकेश और वहां से फिर नेपाली फार्म तक हाइवे के अलग रास्ता ढूंढा जाएगा। एमडीडीए उपाध्यक्ष आर मीनाक्षी सुंदरम ने बताया कि पूरी कोशिश की जा रहा है कि जल्द से जल्द योजना शुरू हो जाए। उसके लिए प्रेजेंटेशन तैयार किया गया है।

गुजरात में साबरमति नदी की तर्ज पर ही अस्थायी राजधानी देहरादून में बिंदाल और रिस्पना नदी के किनारे संवारने के लिए एमडीडीए में तेजी से तैयारी चल रही है। शुक्रवार को इसका भी प्रेजेंटेशन हुआ। तीन फेज में इसकी शुरुआत होगी। इसमें बिंदाल नदी के ढाई-ढाई किलोमीटर के दो फेज होंगे।

एक फेज हरिद्वार बाईपास के दोनों ओर, दूसरा फेज हाथीबड़कला से बिंदाल पुल तक होगा। जबकि तीसरा हिस्सा रिस्पना नदी के किशनपुर से दोनों ओर होगा। इसके लिए विस्थापन प्रक्रिया की रिपोर्ट बनाने की तैयारी की जा रही है।