सरस्वती की खोज : जैसलमेर में महल के नीचे था स्रोत

नासा के सेटेलाइट चित्रों से जैसलमेर में प्राचीन जल के चैनल होने की जो बात सामने आई थी। उसका अहसास किसी न किसी रूप में 1940 में जैसलमेर रियासत के दीवान और बाद में पटियाला हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस बने नंद किशोर गोदानी को हो गया था।

उनकी रुड़की स्थित अपने बेटे से साझा की गई बात पर यकीन किया जाए तो महल के कुएं के नीचे सरस्वती के जल का स्रोत है। केएलडीएवी पीजी कॉलेज रुड़की के पूर्व प्राचार्य एवं शिक्षाविद् डॉ. वीके महेश्वरी के पिता जैसलमेर रियासत में दीवान थे।

रियासत में पानी के लिए बनी बावड़ी (तालाब) ही लोगों की जलापूर्ति का एकमात्र साधन था। जबकि राजा और रानी महल स्थित एक कुएं के पानी का इस्तेमाल करते थे। यह कुआं काफी गहरा था और अंधेरे के कारण इसमें कुछ दिखाई नहीं देता था। रस्सियों और घड़ों के जरिए इसमें से पानी खींचकर निकाला जाता था।

डॉ. महेश्वरी ने बताया कि उनके पिता ने कुएं की थाह नापने के लिए एक सेवक टोकरी में बैठकर कुएं में भेजा। बाहर आने पर उसने बताया कि कुएं में पानी ठहरा हुआ नहीं था, बल्कि इसमें नदी के तेज धारा की तरह पानी एक ओर से दूसरी ओर बह रहा था।

इस पर दीवान को कुएं के नीचे किसी नदी के स्रोत का अहसास हुआ। डॉ. महेश्वरी के अनुसार यह बात 1940 के आसपास की रही होगी, जो उनके पिता ने उन्हें सहारनपुर में प्रवास के रियासत से जुड़े कई किस्से बयां करते हुए बताई थी।
साभार अमर उजाला