…तो ये कारण था सरस्वती नदी के लुप्त होने का

प्रख्यात भूवैज्ञानिक और पद्मभूषण डॉ. केएस वल्दिया का मानना है कि सरस्वती नदी के लुप्त होने के पीछे भी मुख्य कारण भूकंप ही था। एक समय पर यह नदी हिमालय से निकलती थी। हाल के दिनों में सरस्वती को लेकर हो रही चर्चाओं के बीच डॉ. वल्दिया का कहना है कि सरस्वती की दो शाखाएं टौंस और सतलुज थीं।

इनमें ईसा पूर्व 3700 साल के आसपास पश्चिमी शाखा यानी टौंस शाखा पश्चिम की ओर मुड़कर यमुना में मिल गई और पूर्वी शाखा भी ईसा पूर्व 2500 साल के आसपास पश्चिम की ओर मुड़ गई और इस तरह सरस्वती लुप्त हो गई। सरस्वती लुप्त हुई तो हड़प्पा की प्राचीन सभ्यता भी खत्म हो गई।

डॉ. वल्दिया ने शुक्रवार पिथौरागढ़ में अपने आवास पर सरस्वती को लेकर चल रही जिज्ञासाओं को शांत करते हुए कहा कि वह इस लुप्त नदी के बारे में 1968 से अध्ययन कर रहे हैं। उन्होंने एक बार इस नदी के बारे में भाषण भी दिया था। वाल्दिया के इस भाषण से इसरो के प्रमुख सतीश धवन इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने पुस्तक लिखने को कहा। पुस्तक को प्रकाशित करने के लिए इसरो ने सहयोग भी दिया था। साल 2010 में इसी पुस्तक का हिंदी संस्करण प्रकाशित हुआ।

डॉ. वल्दिया कहते हैं कि सरस्वती के बारे में विवरण ऋग्वेद और महाभारत काल में भी मिलता है। वह कहते हैं कि सरस्वती महाभारत काल तक सूख चुकी थी। सरस्वती की जो दो शाखाएं टौंस और सतलुज के नाम से थी वह दोनों पटियाला के पास मिलती थी।

शाखाओं (धाराओं) की चौड़ाई छह से दस किलोमीटर तक थी। डॉ. वल्दिया कहते हैं कि सरस्वती के किनारे ही हड़प्पा की सभ्यता का उदय हुआ था, लेकिन सरस्वती के सूखने के बाद हड़प्पा की सभ्यता भी लुप्त हो गई। उन्होंने कहा कि आज सरस्वती के अस्तित्व के बारे में सेटेलाइट से अध्ययन हो रहा है और इस नदी का अस्तित्व होने की बात कही जा रही है, जबकि वह 1968 से ही इस लुप्त नदी के बारे में अध्ययन कर रहे हैं। 1998 में उन्होंने नदी के अस्तित्व पर गहन अध्ययन कर लिया था।

भूवैज्ञानिक डॉ. केएस वल्दिया ने साफ शब्दों में कहा कि वह भूकंप की घटनाओं के बारे में एक भी शब्द नहीं बोलेंगे। उनसे जब भूकंप आने के कारणों के बारे में पूछा गया तो उन्होंने मुंह बंद कर लिया और कुछ भी बताने से इंकार कर दिया। इसका कोई कारण उन्होंने नहीं बताया।

पद्मभूषण मिलने के बाद पहली बार अपने गृहनगर पिथौरागढ़ पहुंचे डॉ. केएस वल्दिया का शनिवार को यहां जिला पंचायत सभागार में विभिन्न संगठनों की ओर से सम्मान किया जाएगा। इसकी सारी तैयारियां कर ली गई हैं।