राज्यसभा में उठा उत्तराखंड की महिला किसानों का मुद्दा

राज्यसभा में बुधवार को विभिन्न दलों के सदस्यों ने महिला, किसानों, दलितों एवं कमजोर तबकों तथा अल्पसंख्यकों के हितों से जुड़े कई मुद्दे उठाते हुए सरकार से इन मामलों का समाधान निकालने की दिशा में ठोस कदम उठाए जाने की मांग की।

शून्यकाल में बीजेपी के तरूण विजय ने उत्तराखंड में महिला किसानों से जुड़ा मुद्दा उठाते हुए कहा कि राज्य के किसानों में 66 फीसदी महिलाएं हैं। इन महिलाओं को जहां एक ओर कम मजदूरी मिलती है, वहीं उनके साथ कई प्रकार के भेदभाव भी होते हैं।

विजय ने महिला किसान केंद्रित कोई भी योजना नहीं होने की ओर ध्यान दिलाते हुए सरकार से मांग की कि महिला किसानों के लिए कृषि आयोग गठित किया जाए। इस आयोग को महिला किसानों के लिए मजदूरी तय करने की जिम्मेदारी सौंपी जाए।

वाम दलों सहित विभिन्न दलों के सदस्यों ने तरूण विजय की इस मांग का समर्थन किया। माकपा के रीताव्रता बनर्जी ने शून्यकाल में पश्चिम बंगाल के आलू उत्पादक किसानों द्वारा की जा रही आत्महत्या का मुद्दा उठाया। उन्होंने दावा किया कि विभिन्न परेशानियों से हताश होकर चार मार्च से अब तक 25 ऐसे किसानों ने आत्महत्या कर ली।

बनर्जी ने इस मामले में राज्य की तृणमूल कांग्रेस सरकार पर सत्य को दबाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि राज्य में किसानों को फसल बीमा का मुआवजा नहीं मिल पा रहा है, क्योंकि राज्य सरकार ने इसके लिए अपने हिस्से का प्रीमियम नहीं जमा कराया है।

उन्होंने किसान आत्महत्या मामले में तथ्यान्वेषी समिति गठित कर जांच कराए जाने की मांग की। तृणमूल कांग्रेस के सदस्यों ने बनर्जी के दावों का विरोध किया।