कैलाश मानसरोवर यात्रा में श्रद्धा और रोमांच के साथ ग्लेशियर खिसकने का भी डर

वार्षिक कैलाश मानसरोवर यात्रियों की राह में दुश्वारियां कम नहीं हैं। नाभीढांग से लिपुलेख के बीच इस बार भी पहले दो दलों को बर्फ से गुजरना पड़ेगा।

आईटीबीपी नाभीढांग से लिपुलेख तक आठ किलोमीटर के रास्ते में लाल झंडियां लगाने की तैयारी है। यात्री इन्हीं झंडियों के सहारे दुर्गम बर्फीली राह को पार करेंगे। लमारी से मालपा, लखनपुर से मालपा, बूंदी से गुंजी के बीच ग्लेशियर खिसकने का खतरा भी हरदम बना हुआ है। फिलहाल इन्हें काटने का काम चल रहा है।

अस्कोट राज दरबार की पुरानी वस्तुओं की प्रदर्शनी भी यात्रियों को देखने को मिलेगी। इस राजवंश के वर्तमान वारिस कुंवर भानुराज पाल इस बार भी आईटीबीपी सातवीं वाहिनी मुख्यालय में यात्रियों के स्वागत के समय मौजूद रहेंगे।

वाहिनी के सेनानी केदार सिंह रावत के अनुसार जून के पहले हफ्ते में कालापानी और गुंजी में डॉक्टरों की टीम तैनात हो जाएगी। मेडिकल परीक्षण गुंजी में ही किया जाएगा। यहां आस-पास पहाड़ियों की बर्फ पिघली है, जिससे मौसम सुहावना हो गया है।

आईटीबीपी ने सातवीं वाहिनी मुख्यालय में यात्रा के मद्देनजर नियंत्रण कक्ष स्थापित कर दिया है। यह नियंत्रण कक्ष रात दिन खुला रहेगा। इस समय इसमें रास्ते की स्थिति की जानकारी इकट्ठा की जा रही है। यात्रा शुरू होते ही इसमें यात्री दलों की लोकेशन का पता चल जाएगा।