इस साल बुद्ध पूर्णिमा भी दो दिनों की है। रविवार को लोगों ने पूर्णिमा का व्रत रखा और सोमवार को स्नान-दान आदि किया गया। साल 1985 में बना योग इस बार फिर से बन रहा है, जो कि बेहद शुभ माना जा रहा है।

बुद्ध पूर्णिमा रविवार को सुबह 7.48 मिनट से शुरू हो गई, जो कि सोमवार को 9.05 मिनट तक सुबह रही। व्रत-दान आदि का महत्व सूर्योदय व्यापिनी पूर्णिमा में किया जाता है। जबकि रात्रि-व्यापिनी में व्रत किया जाता है। इसलिए रविवार को लोगों ने व्रत कर लिया।

सोमवार को भगवान विष्णु का पूजन, नदियों में स्नान और गरीबों को दान किया गया। इसके साथ ही शाम को चंद्र दर्शन कर अर्घ्य दिया जाएगा। इस बार बुद्ध पूर्णिमा के दिन स्वाति नक्षत्र, तुला राशि पर चंद्रमा, मेष राशि का सूर्य और वृश्चिक पर शनि है।

ऐसे ही ग्रह-नक्षत्रों का संयोग साल 1985 में बना था, जिसे ज्योतिष बेहद शुभ मान रहे हैं। ज्योतिषियों के अनुसार स्वाति नक्षत्र में बुद्ध पूर्णिमा का शुभ संयोग दोगुना फल देने वाला है। बुद्ध पूर्णिमा भगवान बुद्ध का जन्म दिवस माना जाता है। इस उपलक्ष्य में बुद्धा टैंपल और काजू मंदिर में विशेष पूजन किया जाएगा। इसके साथ ही नेपाल में आए भूकंप में लोगों की मदद के लिए सबसे अपील भी की जाएगी।

सोमवार सुबह से लेकर शाम तक होने वाली पूजा में भी भूकंप में मरे लोगों की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना होगी। इसके बाद जूस, हलवा आदि प्रसाद का वितरण किया जाएगा।