आधुनिक टेक्नोलॉजी से संवरेगी ‘गंगा मैया’ की किस्मत!

नई दिल्ली।… गंगा नदी के किनारे बसे करीब 118 शहरों के उद्योगों से उसमें प्रतिदिन गिरने वाले प्रदूषण युक्त कचरे पर नियंत्रण पाने की कोशिश में सरकार आधुनिक प्रौद्योगिकी युक्त ऐसे यंत्र लगाने जा रही है, जिससे 15 मिनट से ज्यादा प्रदूषित जल प्रवाहित करने वाले उद्योग के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू हो सकेगी।

हाल ही में विभिन्न सरकारी एजेंसियों के विशेषज्ञों द्वारा तैयार रिपोर्ट में कहा गया है कि गंगा नदी के किनारे स्थित 118 शहरों से प्रतिदिन निकलने वाले 363.6 करोड़ लीटर अपशिष्ट और 764 उद्योगों के हानिकारक प्रदूषक तत्व इस नदी की धारा को निर्मल बनाने की दिशा में बड़ी चुनौती बने हुए हैं।

वन एवं पर्यावरण मंत्रालय के एक अधिकारी ने कहा कि नदी के किनारे स्थित उद्योगों से निकलने वाले प्रवाह को हम 24 घंटे चलने वाले प्रदूषण निगरानी उपकरण से जोड़ेंगे। यह नई तकनीक पर आधारित है और कई तरह की श्रेणियों में हैं।

उन्होंने कहा कि अगर किसी उद्योग से नदी में पांच मिनट से ज्यादा प्रदूषित जल गिरा, तब एसएमएस आ जाएगा। अगर यह प्रदूषण 15 मिनट से ज्यादा समय तक गिरा तो कानूनी कार्रवाई शुरू हो जाएगी। हम टेक्नोलॉजी के माध्यम से नदियों में प्रदूषण पर लगाम लगाना चाहते हैं।

कोलकाता में नदी में प्रतिदिन 53.4 करोड़ लीटर अपशिष्ट, कानपुर में 42.6 करोड़ लीटर, वाराणसी में 29.5 करोड़ लीटर, पटना में 25.2 करोड़ लीटर, इलाहाबाद में 2.32 करोड़ लीटर और मुरादाबाद में 11.7 करोड़ लीटर अपशिष्ट गंगा नदी में गिरते हैं।

गंगा नदी के तट पर बसे 764 उद्योग और इससे निकलने वाले हानिकारक अपशिष्ट बहुत बड़ी चुनौती हैं, जिनमें 444 चमड़ा उद्योग, 27 रासायनिक उद्योग, 67 चीनी मिलें और 33 शराब उद्योग शामिल हैं।

सूचना के अधिकार (आरटीआई) के तहत जल संसाधन एवं नदी विकास मंत्रालय से प्राप्त जानकारी के अनुसार, जल राज्य का विषय होने के कारण जल संसाधन के विकास एवं बेहतर प्रबंधन के लिए संबंधित राज्य सरकारों द्वारा विभिन्न उपाए किए जाते हैं, जिसमें जल संसाधन संरक्षण, वर्षा जल संचयन और भूजल का कृत्रिम पुनर्भरण शामिल है।
आरटीआई के तहत राष्ट्रीय जल विकास अभिकरण से प्राप्त जानकारी के अनुसार, गंगा नदी के किनारे कुल 764 उद्योग बसे हैं, जिनमें 444 चमड़ा उद्योग, 27 रासायनिक उद्योग, 67 चीनी मिले, 33 शराब उद्योग, 22 खाद्य एवं डेयरी, 63 कपड़ा एवं रंग उद्योग, 67 कागज एवं पल्प उद्योग एवं 41 अन्य उद्योग शामिल हैं।

विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, बिहार और पश्चिम बंगाल में गंगा तट पर स्थित इन उद्योगों द्वारा प्रतिदिन 112.3 करोड़ लीटर जल का उपयोग किया जाता है। इनमें रसायन उद्योग 21 करोड़ लीटर, शराब उद्योग 7.8 करोड़ लीटर, कागज एवं पल्प उद्योग 30.6 करोड़ लीटर, चीनी उद्योग 30.4 करोड़ लीटर, चमड़ा उद्योग 2.87 करोड़ लीटर, कपड़ा एवं रंग उद्योग 1.4 करोड लीटर एवं अन्य उद्योग 16.8 करोड़ लीटर गंगा जल का उपयोग प्रतिदिन कर रहे हैं।