नेपाल-भारत बॉर्डर पर गाड़ियों के फंसने से सड़ रहीं राहत सामग्रियां

भूकंप प्रभावित नेपाल में राहत सामग्री लेकर जा रहे वाहनों के सीमा पर फंसने की वजह से फल, ब्रेड जैसी अन्य खाद्य सामग्रियां खराब होनी शुरू हो गई हैं। उत्तर प्रदेश से नेपाल जाने के लिए सबसे सटीक मार्ग गोरखपुर के नजदीक सोनौली सीमा है।

उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, बिहार और अन्य स्थानों से राहत सामग्री लेकर जा रहे हजारों माल ढुलाई वाहनों, हल्के वाहनों, सरकारी बसों की लंबी कतारों में फंसने की वजह से यह मार्ग बाधित है।

सीमा शुल्क मंजूरी मिलने में देरी होने के कारण राहत सामग्रियों को भेजने में देरी हो रही है। इस कारण ब्रेड, दूध और अन्य सामान खराब हो रहे हैं। जोधपुर की एक स्वयंसेवी संस्था ‘अपना घर आश्रम’ के एक कार्यकर्ता पश्चाताप के साथ कहते हैं कि इससे अच्छा होता कि वह बढ़नी-कृष्णनगर सीमा से आते, जिससे समय कम लगता और सुरक्षा संबंधी औपचारिकताओं से बचा जा सकता था।

नेपाल के सशस्त्र पुलिस बल (सीमा शुल्क प्रभार) के प्रमुख महेंद्र यादव ने बताया, ‘भीड़ नहीं होने की वजह से भानसर में हमारी सीमा शुल्क मंजूरी की प्रक्रिया जल्द ही पूरी हो गई।’ सीमा शुल्क जांच चौकियों के अधिकारियों ने कहा कि सोनौली सीमा पूरी तरह से बाधित होने की वजह से अन्य चौकियों की ओर से आने वाले वाहनों की संख्या बढ़ रही है।

भारत-नेपाल सीमा को जोड़ने वाली एटवा की खराब सड़कों को छोड़कर, राहत सामग्री लेकर काठमांडू जा रहे यात्री और काठमांडू व अन्य क्षेत्रों से लोगों को लेकर वापस सुरक्षित स्थानों के लिए लौट रहे लोगों की ओर से किसी तरह की कोई शिकायत नहीं है।

जांच चौकी के पास खाने-पीने के सामानों की दुकान चला रहे द्रोण प्रसाद आचार्य के मुताबिक, ‘हमे खुशी है कि भारत हमारे बचाव में आगे आया है। यदि भारत से मदद नहीं मिलती तो हमें सोचते हुए डर लगता है कि क्या हुआ होता।’ नेपाल में आए विनाशकारी भूकंप में 6300 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है।