केदारनाथ मंदिर में जल्द शुरू होगा पुनरुद्धार कार्य, ब्लूप्रिंट तैयार

केदारनाथ मंदिर में संरक्षण कार्य का ब्लूप्रिंट तैयार कर लिया गया है। इसके पश्चिमी और पूर्वी द्वारों के साथ ही मुख्य मंडप की दीवारों तक का भी पुनरुद्धार होगा।

आपदा के दौरान क्षतिग्रस्त हुई द्वारों से निकले पत्थरों की जगह नए पत्थरों को रिसेट किया जाएगा। मंदिर की दीवार को भी रिसेट किया जाना है। इसके लिए तराशे गए पत्थरों का कुछ स्टॉक तैयार है। कार्य के लिए भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) दून सर्किल की टीम इसी 5 मई को केदारनाथ रवाना हो जाएगी। 10 मई से पुनरुद्धार का कार्य शुरू हो जाने की संभावना है।

इस सीजन में कार्य के लिए तकरीबन तीन महीने का समय होगा। सूत्रों के मुताबिक संरक्षण कार्य के लिए 75 से 80 लाख का खर्च होगा। इसका प्रस्ताव एएसआई के नई दिल्ली स्थित महानिदेशक कार्यालय को भेजा जा चुका है।

इसे हरी झंडी मिलने की पूरी संभावना है। एएसआई की इस कार्य के संबंध में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की वैज्ञानिक शाखा से भी बात हुई है। इस शाखा के विशेषज्ञों को मंदिर के रासायनिक संरक्षण का कार्य करना है।

केदारनाथ मंदिर रुद्रप्रयाग जिले में पड़ता है। इस जिले को भूकंप की दृष्टि से बेहद संवेदनशील जोन-5 में रखा गया है। मंदिर में होने वाले पुनरुद्धार और संरक्षण कार्य में इस संवेदनशील बिंदु का भी खास ध्यान रखा जाएगा।

एएसआई अपना कार्य करते वक्त भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान यानी आईआईटी चेन्नई के सुझावों पर भी अमल करेगी। आईआईटी के विशेषज्ञ ही मंदिर की स्टेबिलिटी रिपोर्ट तैयार कर रहे हैं। इससे यह पता चलेगा कि मंदिर को भूकंप से खतरा तो नहीं?

केदारनाथ मंदिर में फर्श लकड़ी का हो या संगमरमर का, इसे लेकर बद्री-केदार मंदिर समिति और एएसआई के अधिकारियों में कुछ मतभेद था। एएसआई, दून सर्किल के अधीक्षण पुरातत्वविद् के अनुसार इस पर सहमति का प्रयास होगा। सारी बातें लिखित में तय की जाएंगी।