केदारनाथ के लिए हेलीकॉप्टर सेवा की अनुमति नहीं देने पर केंद्र सरकार की आलोचना

केदारनाथ धाम के लिए हेलीकाप्टर सेवा की अनुमति न देने के लिए केंद्र सरकार की आलोचना करते हुए उत्तराखंड कांग्रेस अध्यक्ष किशोर उपाध्याय ने गुरुवार को कहा कि एनडीए सरकार के इस रवैये से श्रद्घालुओं को असुविधा होने और स्थानीय व्यापारियों के रोजगार पर हथौड़ा पड़ने के साथ ही राज्य सरकार की छवि पर भी प्रतिकूल असर पड़ रहा है।

देहरादून में जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में उपाध्याय ने कहा कि 21 अप्रैल से प्रदेश में चारधाम यात्रा शुरू हो चुकी है और राज्य सरकार द्वारा बार-बार अनुरोध किए जाने के बावजूद अब तक केंद्रीय उड्डयन मंत्रालय द्वारा केदारनाथ के लिए हेलीकाप्टर सेवा की अनुमति नहीं दी गयी है।

समुद्र तल से 3581 मीटर की उंचाई पर रूद्रप्रयाग जिले में स्थित केदारनाथ धाम मुख्य सडक मार्ग से काफी दूरी पर स्थित है और वहां जाने के लिए श्रद्घालुओं को 18 किलोमीटर पैदल चलना पड़ता है।

उपाध्याय ने कहा, ‘केन्द्र सरकार द्वारा हेलीकॉप्टर उड़ान की अनुमति न मिलने के कारण केदारनाथ दर्शन के लिए जाने वाले श्रद्वालुओं को अत्यधिक असुविधाओं का सामना करना पड़ रहा है। राज्य सरकार द्वारा बार-बार अनुरोध करने के बावजूद अभी तक केन्द्र सरकार के उड्डयन मंत्रालय द्वारा हेलीकाप्टर सेवा शुरू करने की अनुमति प्रदान नही दी गई है।’ उन्होंने कहा कि केदारनाथ दर्शन के लिए जाने वाले तीर्थयात्री गौरीकुण्ड, फाटा एवं लिनचोली आदि विभिन्न स्थानों में रुके हुए हैं, जिससे स्थानीय प्रशासन को भी अत्यधिक असुविधाओं का सामना करना पड़ रहा है।

प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि केंद्र सरकार के इस रवैये के कारण स्थानीय व्यापारियों के रोजगार पर हथौडा पड़ने के साथ ही हेलीकॉप्टर कम्पनियों को भी काफी नुकसान उठाना पड़ रहा है और राज्य सरकार की छवि पर भी काफी प्रतिकूल असर पड़ रहा है।

24 अप्रैल को केदारनाथ के कपाट खुलने के मौके पर कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी द्वारा केदारनाथ पैदल यात्रा करने को श्रद्घालुओं में विश्वास बढ़ाने वाला बताते हुए उपाध्याय ने कहा कि इससे देश और विदेश के श्रद्धालुओं में काफी अच्छा सन्देश गया है।

हालांकि, उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार की उपेक्षा के कारण यात्रियों को काफी कठिनाईयों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने इस संबंध में बीजेपी के लोकसभा सांसदों से केंद्र सरकार से बात कर सहयोग करने की अपेक्षा भी की।