‘अनोखे डॉक्टर’ ने मिर्च खिलाकर किया बीमार लड़की का इलाज

पत्नी को रोज पीटने वाले एक नाई से उसकी पत्नी ने बदला लेने के लिए ऐसा रास्ता अपनाया कि जिसने भी सुना हैरान रह गया। पत्नी ने उसे हकीम बताकर लोगों के सामने पेश कर दिया। इसके बाद जो हुआ वो इतना हैरतंगेज था कि कर कोई दांतों तले उंगली दबाने को मजबूर हो गया।

नाई जब हकीम बना तो कई ऐसी हास्यास्पद स्थितियां उत्पन्न हुईं, जिनके चलते वह लोगों से पिटने लगा। पत्नी का बदला पूरा हुआ, लेकिन हकीम बना नाई दो प्यार करने वालों को मिलाने का जरिया भी बन गया।

विश्व रंगमंच दिवस के उपलक्ष्य में ओएनजीसी राजभाषा विभाग की ओर से देहरादून स्थित एएमएन घोष ऑडीटोरियम में धाद नाट्य मंडल ने हास्य नाटक ‘नीम-हकीम’ की प्रस्तुति दी। नाटक की शुरुआत नाई मुस्तैद और उसकी पत्नी जमीला के झगड़े से हुई।

मुस्तैद हर शाम शराब पीकर पत्नी को पीटता था। एक दिन जमीला को लल्लन और गुल्लन मिलते हैं, जिन्हें अच्छे डॉक्टर की तलाश होती है। वह बताते हैं कि हमारे मालिक की लड़की गूंगी हो गई है, जिसका इलाज करना है।

जमीला को पति से बदला लेने का मौका मिल जाता है। वह कहती है कि उसका पति मुस्तैद अच्छा डॉक्टर है, लेकिन वह तब तक यह बात नहीं मानता, जब तक उसकी खूब पिटाई न की जाए। गुल्लन और लल्लन मुस्तैद को जमकर पीटने के बाद साथ ले जाते हैं।

एक बार मार खाने के बाद मुस्तैद डॉक्टर बनकर रहने में ही भलाई समझता है। वह गूंगी नज्जो को रोज दस हरी मिर्च खिलाने को कहता है। इस बीच मुस्तैद की मुलाकात महबूब से होती है। महबूब बताता है कि वह नज्जो से प्यार करता है। नज्जो की शादी कहीं और न हो, इसके लिए वह बीमारी का नाटक कर रही है। मुस्तैद, महबूब को अपना कंपाउंडर बना लेता है और इसके लिए महबूब से पैसे भी लेता है। कुछ दिन बाद वह दोनों को भगा देता है।

इस बीच महबूब के चाचा का इंतकाल हो जाता है और उनकी सारी जायदाद महबूब को मिल जाती है। इसके बाद वह नज्जो को लेकर उसके मायके आता है। नज्जो के पिता दोनों की शादी करा देते हैं। मॉलियर लिखित नाटक का निर्देशन कैलाश कंडवाल ने किया। नज्जो का किरदार सीमा रावत, महबूब अली का पंकज उनियाल, जमीला का गायत्री, मुस्तैद का विशाल सावन, लल्लन का प्रताप सिंह और गुल्लन का किरदार कैलाश कंडवाल ने निभाया।