उत्तराखंड में पहले साइबर थाने का उद्घाटन, अब नहीं बचेंगे ऑनलाइन फ्रॉड करने वाले

देहरादून

साइबर अपराधों के पंजीकरण और विवेचना के लिए उत्तराखंड की अस्थायी राजधानी देहरादून में उत्तराखंड के पहले साइबर पुलिस थाने की स्थापना की गई है। साइबर अपराधों के लिए पृथक से पुलिस थाना गठित करने वाला उत्तराखंड भारत के चुनिंदा राज्यों में शामिल हो गया है। देहरादून में जारी सरकारी विज्ञप्ति के अनुसार, मुख्यमंत्री हरीश रावत ने बुधवार देर शाम गांधी रोड पर राज्य के पहले साइबर थाने का उद्घाटन किया।

 

इस मौके पर मुख्यमंत्री रावत ने कहा कि बहुत कम राज्यों में साइबर थाने खुले हैं और आज हम साइबर अपराध तलाश के क्षेत्र में चुनिन्दा राज्यों में शामिल हो गए हैं। उन्होंने कहा कि यहां पर अच्छी ट्रेनिंग दी जाएगी और योग्य ट्रेनरों एवं विशेषज्ञों के माध्यम से सेमिनार आयोजित कर इसमें दक्षता प्राप्त करने की कोशिश की जाएगी।

 

मुख्यमंत्री ने उम्मीद जतायी कि साइबर अपराधों को रोकने में यह पुलिस थाना महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। उन्होंने यह भी आशा व्यक्त की कि यह पुलिस थाना बेहतर साबित होगा तथा अन्य जिलों के लिए प्रेरणा के साथ ही ट्रेनिंग देने में भी सहायक होगा।

 

रावत ने कहा कि हमारे यहां ‘क्राइम डिटेक्शन’ का अनुपात अन्य राज्यों की अपेक्षा अच्छा है और पुलिस आधुनिकीकरण के लिए सरकार यथासंभव सहयोग करेगी। इस अवसर पर पुलिस महानिदेशक बीएस सिद्धू ने बताया कि राज्य में आईटी एक्ट-2000 एवं आईटी एक्ट-2008 (संशोधित) के अन्तर्गत साइबर अपराधों की रोकथाम के लिए शासन ने गत 21 जनवरी को साइबर थाना स्थापित किए जाने की अधिसूचना जारी की थी।

 

सिद्धू ने साईबर क्राइम पुलिस थाने का निरीक्षण कर साइबर अपराधों के कुशल जांच हेतु निर्देशित करते हुए इसे जनसामान्य के प्रति संवेदनशील बनाने एवं साइबर अपराध से पीड़ित व्यक्तियों को राहत पहुंचाने को कहा। उन्होंने वर्तमान में भारतीय दंड विधान के सामान्य अपराधों के अनावरण में भी सूचना एवं तकनीक के महत्वपूर्ण योगदान के मद्देनजर ‘साइबर प्रिवेन्शन मैकेनिज्म एवं रिसोर्स बिल्डिंग’ की आवश्यकता पर भी बल दिया।

साइबर थाने में अपराधों की विवेचना के लिए थाने पर तीन टीमें नियुक्त है जिनका पर्यवेक्षण एक पुलिस उपाधीक्षक स्तर के अधिकारी द्वारा किया जाएगा।