जुट रही UKD की ताकत, अब दिवाकर भट्ट की हुई ‘घर वापसी’

पुराने मतभेदों और गिले शिकवों को दूर करने के बाद दिवाकर भट्ट एक बार फिर उत्तराखंड क्रांति दल में लौट आए हैं। भट्ट अपनी वापसी को नई पारी की तरह ले रहे हैं। उनका कहना है कि पुरानी गलतियों से सबक लेकर ही आगे बढ़ा जा सकता है। भट्ट दल के लिए सबसे बड़ी चिंता जनता के बीच UKD के प्रति खत्म हो चुके विश्वास को दोबारा हासिल करना मानते हैं।

दिवाकर भट्ट की यूकेडी में वापसी पर आयोजित पत्रकार वार्ता दल के कार्यकारी अध्यक्ष एपी जुयाल ने बताया कि दल के विभिन्न समूहों में एकता के प्रयास सार्थक रहे हैं, इससे दल में दिवाकर भट्ट वापस आए हैं। दल से जितने भी कार्यकर्ताओं को किसी भी तरह का निष्कासन या निलंबन झेलना पड़ा है उसे तुरंत प्रभाव से निरस्त कर दिया है।

पार्टी के शीर्ष नेता काशी सिंह ऐरी, बीडी रतूड़ी और त्रिवेंद्र पंवार के बाद अब दिवाकर भट्ट के एक साथ आने से दल को मजबूती मिलेगी। उन्होंने कहा कि दल के मई में होने वाले अधिवेशन तक सभी जिला कार्यकारिणी का नए सिरे से गठन किया जाएगा, जबकि मौजूदा केंद्रीय कार्यकारिणियां पहले अधिवेशन तक पहले की तरह कामकाज करती रहेंगी।

दिवाकर ने कहा कि उन्हें जीवन में कई राष्ट्रीय दलों में जाने के मौके मिले, लेकिन उनकी आस्था और विश्वास यूकेडी के प्रति रहा है। दल एक सकारात्मक सोच के साथ अब दोबारा राज्य में विश्वास हासिल करने की मुहीम चलाएगा। भट्ट ने माना कि बार-बार हुए विघटनों से यह नुकसान हुआ है कि दल वोट शेयर एक फीसदी से भी कम हो गया है। अब पार्टी संविधान में संशोधन किया जा रहा है, जिससे भविष्य में दोबारा विघटन, निलंबन और निष्कासन के लिए जल्दबाजी में फैसले नहीं लिए जा सकें।

शीर्ष नेताओं के एक मंच पर आने के बाद पार्टी विधायक और कैबिनेट मंत्री प्रीतम सिंह पंवार से बातचीत चल रही है। जुयाल ने बताया कि पंवार उनके साथ हैं वे यूकेडी के किसी धड़े में कभी शामिल नहीं हुए, लेकिन पार्टी से उनकी आस्थाएं जुड़ी हुई हैं। सरकार को समर्थन के मुद्दे पर यूकेडी नेताओं का कहना है कि फिलहाल अधिवेशन तक इस पर कोई फैसला नहीं लिया जाएगा। सरकार को दल का समर्थन जारी रहेगा।

राज्य आंदोलनकारियों के मुद्दे पर भट्ट ने स्थिति साफ करते हुए कहा कि राजनीतिक दल इसे सियासी रंग चढ़ा रहे हैं। राज्य गठन के लिए यहां के प्रत्येक नागरिक का योगदान है ऐसे में सिर्फ जेल या घायल ही आंदोलनकारी नहीं हैं। हम आंदोलन नौकरी या अन्य लाभ पाने के लिए नहीं कूदे थे। हमारी धारणा राज्य गठन की थी, जिसमें सभी नागरिकों को समान अवसर मिले। ऐसे में विधेयक लाकर जनता को भ्रमित करने की सियासत कांग्रेस-बीजेपी कर रहे हैं।