हिमालयी राज्यों के विकास के लिए बने एक अलग मंत्रालय : निशंक

उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और बीजेपी सांसद रमेश पोखरियाल निशंक ने हिमालयी क्षेत्रों से जुड़े राज्यों के लिए एक अलग मंत्रालय गठित करने की मांग की है। लोकसभा में उन्होंने कहा, अलग मंत्रालय गठित करने से पर्वतीय राज्यों का तेजी से विकास हो पाएगा।

यही नहीं निशंक ने हरिद्वार में अंतरराष्ट्रीय हिमालय विश्वविद्यालय स्थापित करने और उत्तराखंड में वन और उद्यान क्षेत्र में व्यापक संभावनाओं के मद्देनजर विश्वस्तरीय शिक्षा एवं शोध केंद्र बनाने की भी मांग की। निशंक ने जैव विविधता से भरे उत्तराखंड में जड़ी-बूटी शोध एवं उत्पादन केंद्र स्थापित करने और अंतरराष्ट्रीय स्तर का संग्रहालय बनाने की भी मांग की।

उन्होंने कहा कि पर्वतीय राज्यों में इस तरह का मॉडल अपनाने के बाद न केवल पलायन रुकेगा, बल्कि इससे पिछड़ा हुआ राज्य विकास की दौड़ में अन्य राज्यों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चल सकेगा। निशंक ने याद दिलाया कि हिमालयी राज्य सामरिक दृष्टि से भी संवेदनशील होने के कारण बेहद महत्वपूर्ण हैं।

निशंक ने पारिस्थितिकी की दृष्टि से संवेदनशील गंगोत्री से ऋषिकेश क्षेत्र एवं हरिद्वार पर विशेष ध्यान केंद्रित किए जाने पर बल दिया। इसके साथ ही उत्तराखंड समेत सभी हिमालयी राज्यों के लिए विशेष पैकेज की मांग की। पर्वतीय क्षेत्रों में अवस्थापना विकास को बढ़ावा देने की दृष्टि से उन्होंने ऋषिकेश-डोईवाला-कर्णप्रयाग, टनकपुर-जौलजीवी रेल मार्गों पर तेजी से कार्य करवाने का आग्रह किया। निशंक ने उत्तराखंड में 108 आपातकाल एंबुलेंस सेवा को सुदृढ़ करने पर जोर दिया।

देश में कौशल विकास एवं नये उद्यमियों को प्रोत्साहन दिये जाने का स्वागत करते हुए निशंक ने उत्तराखंड में कृषि, बागवानी, जड़ी-बूटी और वानिकी आधारित कुटीर उद्योगों के विकास हेतु निश्चित समय सीमा के भीतर विशेष कार्ययोजना बनाने पर बल दिया। उत्तराखंड में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए एवं हरिद्वार-देहरादून औद्योगिक गलियारा विकसित किए जाने पर बल दिया। उन्होंने विश्वास जतायो कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कुशल नेतृत्व में देश को समृद्ध, सशक्त बनाने का सपना साकार हो सकेगा।