देहरादून में ‘आदमखोर’ गुलदार का आतंक, घरों में कैद हुई जनता

इन दिनों समूचे उत्तराखंड में गुलदार की दहशत है। खासतौर पर देहरादून जिले में तो लोग आदमखोर गुलदार के साए में जी रहे हैं। कभी राज्य की अस्थायी राजधानी देहरादून में तो कभी चकराता के छावनी क्षेत्र के आसपास गुलदार देखा जा रहा है।
[manual_related_posts]

अक्सर गुलदार आबादी वाले क्षेत्रों में घुस जा रहा है। गुलदार के रिहायशी इलाके में सक्रिय होने से लोग खौफजदा हैं। समूचे क्षेत्र में डर का माहौल है। गुलदार अब तक लोगों पर दो बार हमले कर चुका है। हालांकि वे किस्मत से गुलदार का शिकार होने से बच गए।

गुलदार के इसान पर हमले की घटनाएं बढ़ने के बावजूद वन विभाग अभी तक हरकत में नहीं आया है। जिससे लोगों में वन विभाग के प्रति भारी गुस्सा है। बीते शनिवार को भी गुलदार ने चकराता-लाखामंडल मार्ग पर स्थित ग्वांसापुल के करीब निर्माण कार्य में जुटे नेपाली मूल के श्रमिक पर हमला कर दिया था।

हालांकि मजदूर ने गुलदार का मुकाबला किया और अन्य साथियों के शोर मचाने पर गुलदार जंगल में भाग गया। उसी दिन शाम को पास के डाकरा गांव में भी गुलदार एक पिता-पुत्र पर लपका था। दोनों ने सेना के बैरक में छिपकर किसी तरह जान बचाई।

गुलदार काफी देर तक बैरक के बाहर ही डटा रहा। ग्रामीणों के आने पर गुलदार वहां से भागा। गुलदार के डर के कारण गांव के लोग जंगल में घास लेने के लिए भी नहीं जा पा रहे हैं।

गुलदार से बच्चों और महिलाओं को सबसे ज्यादा खतरा है। लोगों को पशुधन की भी चिंता सता रही है। इसके साथ ही राजधानी देहरादून के एफआरआई में भी बार-बार गुलदार देखा जा रहा है। पिछले दिनों उसने घर के बाहर फोन पर बात कर रही एक किशोरी पर हमला किया, जिसमें किशोरी की मौत हो गई।