‘फूल देई छम्मा देई’, आपको नव वर्ष की शुभकामनाएं

हिन्दू नव वर्ष यानी चैत्र महीने की 1 पैट (गते) को उत्तराखंड में फूल देई के नाम से मनाया जाता है. आज यानी 15 मार्च 2015 को समूचे उत्तराखंड में बड़ी धूम-धाम से फूल देई मनाई जा रही है.

उत्तराखंड की धरती पर अलग-अलग ऋतुओं के अनुसार पर्व-त्योहार मनाए जाते हैं. ये पर्व एक ओर हमारी संस्कृति को उजागर करते हैं, तो दूसरी ओर प्रकृति के प्रति पहाड़ के लोगों के सम्मान और प्यार को भी दर्शाते हैं. इसके अलावा पहाड़ की परंपराओं को कायम रखने के लिए भी ये पर्व-त्योहार खास हैं.

इस त्योहार को फूल संक्रांति भी कहा जाता है, इसका सीधा संबंध प्रकृति से है. इस समय चारों ओर छाई हरियाली और नाना प्रकार के खिले फूल प्रकृति के यौवन में चार चांद लगाते हैं. हिन्दू कैलेंडर के अनुसार चैत्र महीने से ही नव वर्ष शुरू होता है. इस नव वर्ष के स्वागत के लिए खेतों में सरसों खिली है तो पेड़ों में फूल भी आने लगे हैं.

चैत्र महीने के पहले दिन बच्चे लोगों के घरों में जाकर उनकी दहलीज पर फूल चढ़ाते हैं और सुख-शांति की कामना करते हैं. इसके बदले में उन्हें परिवार के लोग गुड़, चावल व रुपये देते हैं.

मेष संक्रांति कुमाऊं में फूल संक्रांति के नाम से भी जानी जाती है. फूल देई की परंपरा को मनाने के लिए चैत्र महीने के पहले दिन से एक दिन पहने ही बच्चे फूल चुनकर ले आते हैं और नव वर्ष के पहले दिन बच्चे इसे टोकरी व थाली में लेकर घर-घर पहुंचते हैं.
इस दिन लोगों के घरों से मिले चावल से शाम को हलवा भी बनाया जाता है. पर्व के मौके पर बच्चे एक गीत भी गाते हैं. इस गीत को शुभकामनाओं के रूप में गाया जाता है…

फूल देई छम्मा देई
देनी द्वार भर भकार
तेरी देई नमस्कार…

उत्तरांचल टुडे के पाठकों को फूल देई की हार्दिक शुभकामनाएं…