ग्लेशियरों की होगी निगरानी, ताकि फिर ना आए केदारनाथ जैसी आपदा

देहरादून।… उत्तराखंड में केदारनाथ जैसी आपदा फिर न हो, इसके लिए केंद्रीय जल आयोग और राज्य सरकार पिघलते हिमखंडों के जलस्तर पर नजर रखने की कवायद शुरू कर रहे हैं. इसके लिए संवेदनशील क्षेत्रों में पांच हाइड्रोमेट साइट्स (निगरानी केंद्र) स्थापित किए जाएंगे. बर्फ कम होते ही मई में योजना का पहला चरण शुरू हो जाएगा.
जून 2013 में केदारनाथ आपदा में राज्य के बड़े हिस्से में बड़ी तबाही हुई थी. इसका मुख्य कारण केदारनाथ धाम से ठीक ऊपर स्थित चौराबाड़ी ग्लेशियर में झील के फटने को बताया गया था.
ऐसे में अब केंद्रीय जल आयोग राज्य में संवेदनशील हिमखंडों (ग्लेशियरों) पर नजर रखेगा. योजना के तहत पांच निगरानी केंद्र बनाकर हिमखंडों से नदियों में आने वाले पानी के जलस्तर का रिकॉर्ड दर्ज किया जाएगा. किसी भी वक्त स्थिति बिगड़ने की आशंका पर तुरंत राज्य सरकार को सूचित किया जाएगा, ताकि राहत व बचाव के जरूरी कदम उठाए जा सकें.
बद्रीनाथ के पास चीन बॉर्डर पर स्थित माणा गांव, केदारनाथ क्षेत्र में गुप्तकाशी, बागेश्वर में खाती गांव, उत्तरकाशी में गोमुख ग्लेशियर और टिहरी के गंगी में बनेंगे निगरानी केंद्र.