केदारनाथ में फर्श को लेकर मंदिर समिति और ASI के बीच विवाद

बाबा केदारनाथ के मंदिर को लेकर एक बार फिर विवाद सामने आया है. इस बार मंदिर के फर्श को लेकर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) और बद्री-केदार मंदिर समिति के बीच विवाद हो गया है.
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एएसआई ने ग्रेनाइट के फर्श के चिकने होने का हवाला देते हुए समिति को फर्श लकड़ी का बनाए जाने का प्रस्ताव दिया था, लेकिन समिति इस पर कतई तैयार नहीं है. यही कारण है कि यहां फर्श नहीं डाला जा सका है और केवल पत्थरों को ही सेट किया गया है.

एएसआई तापमान नियंत्रण और फिसलन की दृष्टि से लकड़ी के फर्श को सुरक्षित मानकर इसका फर्श तैयार करने का प्रस्ताव दे रहा था. इसे मंदिर समिति ने पूजा के दौरान प्रयोग होने वाली सामग्री से इसे नुकसान पहुंचने और आग के प्रति संवेदनशील होने की वजह से नहीं माना.

एएसआई ने इसी तरह की दिक्कतें देखते हुए मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (एमओयू) की बात उठाई है, ताकि हर काम पर स्थिति साफ हो सके. एएसआई संरक्षित मंदिर न होने की वजह से समिति को साथ लेना एएसआई के लिए आवश्यक है.

इससे पहले 2003 में एएसआई इसके संरक्षण के संबंध में प्रयास कर चुकी है, लेकिन वह कवायद परवान नहीं चढ़ सकी. इससे जिन कामों को एएसआई अपने स्तर पर करा सकती थी, उसके लिए समिति की सहमति जरूरी है.