योगेंद्र और प्रशांत के इस ‘चिट्ठी बम’ का क्या जवाब देंगे केजरीवाल

आम आदमी पाटी (AAP) का अंतर्कलह लगातार बढ़ता जा रहा है और अब ये चरम की ओर जा रहा है. AAP की PAC से बाहर किए गए योंगेंद्र यादव और प्रशांत भूषण ने बुधवार को पार्टी के कार्यकर्ताओं को एक चिट्ठी लिखी. उस चिट्ठी में मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पर कई सनसनीखेज आरोप लगाए गए हैं.

योगेंद्र, प्रशांत की चिट्ठी के बाद आम आदमी पार्टी में हंगामा और बढ़ेगा ही. उल्‍लेखनीय है कि मंगलवार को AAP के भीतर हो रहा हंगामा सड़क पर आ गया था. योगेंद्र यादव और प्रशांत भूषण को AAP की पीएसी से निकाले जाने के बाद अरविंद केजरीवाल के करीबियों ने औपचारिक रूप से दोनों नेताओं पर खुल कर हमला किया.

मनीष सिसोदिया, संजय सिंह, गोपाल राय और पंकज गुप्ता ने आरोप लगाया कि योगेंद्र यादव और प्रशांत भूषण दिल्ली चुनाव के दौरान पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल थे. दोनों ने केजरीवाल की छवि खराब करने की भी कोशिश की, तभी उन्हें पीएसी से निकाला गया.
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हालांकि योगेंद्र यादव और प्रशांत भूषण दोनों नेताओं ने सभी आरोपों को गलत बताया था और मामले में अपना पक्ष रखने की बात की थी. बुधवार को आप कार्यकर्ताओं को पत्र लिखकर दोनों नेताओं के सामने अपना पक्ष रखा और अरविंद केजरीवाल पर सनसनीखेज आरोप लगाए.

योगेंद्र और प्रशांत ने अपने पत्र में आरोप लगाया है कि AAP संयोजक अरविंद केजरीवाल ने लोकसभा चुनाव में हार के बाद कांग्रेस से समर्थन लेकर दिल्ली में दोबारा सरकार बनाने की कोशिश की थी. पार्टी के अन्य नेताओं ने केजरीवाल को समझाने की कोशिश की, हालांकि वह और उनके अन्य सहयोगी अपने फैसले पर अड़े रहे.

योगेंद्र, प्रशांत ने अपने पत्र में लिखा कि आप के तमाम नेताओं के समझाने-बुझाने की तमाम कोशिशों के बावजूद केजरीवाल और कुछ अन्य सहयोगी सरकार बनाने पर अड़े रहे. दिल्ली के अधिकांश विधायकों ने उनका समर्थन किया. लेकिन दिल्ली और देश भर के जिस-जिस कार्यकर्ता और नेता को पता लगा, अधिकांश ने इसका विरोध किया और पार्टी छोड़ने तक की धमकी दी.

उन्होंने लिखा, आप ने हाईकोर्ट में विधानसभा भंग करने की मांग कर रखी थी. वैसे भी कांग्रेस पार्टी लोकसभा चुनाव में जनता द्वारा खारिज की जा चुकी थी. ऐसे में कांग्रेस के साथ गठबंधन पार्टी की साख को खत्म कर सकती थी. हमने पार्टी के भीतर यह आवाज उठाई. यह आग्रह भी किया कि ऐसा कोई भी निर्णय पीएसी और राष्ट्रीय कार्यकारिणी की राय के मुताबिक किया जाए. लेकिन लेफ्टिनेंट गवर्नर को चिट्ठी लिखी गई और सरकार बनाने की कोशिश हुई. यह कोशिश विधानसभा के भंग होने से ठीक पहले नवंबर महीने तक चलती रही.

योगेंद्र और प्रशांत ने लिखा कि हम दोनों ने संगठन के भीतर हर मंच पर इसका विरोध किया. इसी प्रश्न पर सबसे गहरे मतभेद की बुनियाद पड़ी. यह फैसला हम आप पर छोड़ते हैं कि यह विरोध करना उचित था या नहीं. अगर उस समय पार्टी कांग्रेस के साथ मिलकर सरकार बना लेती तो क्या हम दिल्ली की जनता का विश्वास दोबारा जीत पाते?

उल्लेखनीय है कि 2013 विधानसभा चुनावों के बाद आप ने कांग्रेस के सहयोग से ही सरकार बनाई थी, हालांकि जनलोकपाल के मुद्दे बाद 49 दिनों बाद ही अरविंद केजरीवाल ने इस्तीफा दे दिया. योगेंद्र, प्रशांत ने चिट्ठी में लिखा की लोकसभा चुनावों के बाद अरविंद केजरीवाल के करीबी नेताओं ने पीएसी को भंग कराने की भी कोशिश की.

उन्होंने लिखा कि लोकसभा चुनाव का परिणाम आते ही मनीष सिसोदिया, संजय सिंह और आशुतोष ने एक अजीब मांग रखनी शुरू की. उन्होंने कहा कि हार की जिम्मेदारी लेते हुए पीएसी के सभी सदस्य अपना इस्तीफा अरविंद को सौंपे, ताकि वे अपनी सुविधा से नई पीएसी का गठन कर सकें. राष्ट्रीय कार्यकारिणी को भंग करने तक की मांग उठी. हम दोनों ने अन्य साथियों के साथ मिलकर इसका कड़ा विरोध किया.

योगेंद्र, प्रशांत ने आगे लिखा कि अगर हम ऐसी असंवैधानिक चालों का विरोध न करते तो हमारी पार्टी और कांग्रेस या बसपा जैसी पार्टी में क्या फर्क रह जाता?