लड़कियों के लिए प्रेरणा बनी मोनिका के संघर्ष की कहानी

पेशेवेर फुटबॉल ट्रेनर की राह पर बढ़ रही उत्तराखंड की पहली और एकमात्र महिला फुटबॉल ट्रेनर मोनिका बिष्ट की कहानी इन दिनों इंटरनेट पर धूम मचा रही है. मुंबई में ट्रेनिंग के दौरान शूट किए गए साढ़े तीन मिनट के वीडियो में मोनिका ने अपने संघर्ष की दास्तां और भविष्य के सपनों के बारे में बात की.
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राज्य की अस्थायी राजधानी देहरादून के महिंद्रा ग्राउंड में एक समर कैंप से फुटबॉल खेलने की शुरुआत करने वाली जैंतनवाला गांव की 25 वर्षीय मोनिका बिष्ट राज्य की पहली महिला पेशेवर ट्रेनर बनने वाली हैं. पटियाला से एनआईएस ट्रेनिंग के बाद कोच बनी मोनिका ने पुरुष प्रधान माने जाने वाले खेल में खास मुकाम हासिल किया है.

जिला खेल कार्यालय, यूनिसन वर्ल्ड स्कूल में ट्रेनर बनने के बाद नवंबर 2014 में मोनिका ने यूरोपियन फुटबॉल क्लब बार्सिलोना के गुड़गांव स्थित एफसीबी स्कोला फुटबॉल एकेडमी ज्वाइन की. फरवरी 2015 में मुंबई में वेस्टर्न इंडिया फुटबॉल एसोसिएशन के बैनर तले एशियन फुटबॉल कंफेडरेशन का डी लाइसेंस कोर्स भी कर चुकी हैं.

हालांकि इसका रिजल्ट आना बाकी है. कोर्स के दौरान एक निजी चैनल ने मोनिका का साढ़े तीन मिनट का वीडियो शूट किया. इसमें मोनिका ने अपने खेल कॅरियर के शुरुआती संघर्ष और बिना कोच के खेलने का दर्द के बारे में बताया. मोन‌िका का सपना लड़कियों को फुटबॉल से जोड़ने का है.