‘बेटी बचाओ अभियान’ के लिए सरस्वती को मिला तीलू रौतेली पुरस्कार

बागेश्वर।… ‘बेटी बचाओ अभियान’ के लिए समर्पित बागेश्वर जिले के भिटालगांव निवासी सरस्वती देवी को राज्य सरकार ने इस साल तीलू रौतेली पुरस्कार के लिए नामित किया है. जल्द ही देहरादून में मुख्यमंत्री हरीश रावत उन्हें यह पुरस्कार देंगे. भिटालगांव निवासी विजय सिंह बिष्ट की पत्नी सरस्वती के यूं तो दो बेटे हैं जो अभी इंटर की परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं. बेटी की चाहत ने उन्हें ‘बेटी बचाओ अभियान’ से जोड़ दिया.
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सरस्वती देवी न केवल बेटियों को बचाने के लिए संदेश देती हैं बल्कि बेटियों को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित भी करती हैं. जून 2014 में जब सरस्वती देवी दवा लेने के लिए जिला अस्पताल गई तो वहां एक दंपति की परेशानी देखकर उनसे परेशानी का कारण पूछ बैठीं. उस दंपति ने बताया कि अभी-अभी बेटी पैदा हुई है. उनका परिवार बेहद गरीब है. परिवार में बेटे की चाहत थी, लेकिन छठी बेटी पैदा हो गई है.

इस बीच भीड़ जमा हो गई तथा कई लोग बेटी को गोद लेने के लिए आगे आने लगे. तभी सरस्वती देवी ने कहा कि वह इस मासूम बेटी की परवरिश करेंगी. ऐसा कहकर वह नन्हीं बिटिया को अपने घर ले आईं. बाद में उसका नाम अनुष्का रख दिया गया. आज बेटी नौ महीने की हो गई है. सरस्वती देवी के बेटियों के प्रति इस लगाव की सभी लोगों ने सराहना की. उनका कहना है कि बेटी व बेटे में भेद नहीं होना चाहिए. आज बेटों से ज्यादा नाम बेटियां कमा रही हैं.

ऐसा भी नहीं है कि सरस्वती देवी का परिवार अमीर हो, उनका परिवार भी गरीबी से जूझ रहा है. उनके पति वन विभाग में नौकरी करते हैं. घर में कमाई का और कोई जरिया नहीं है. घर का सारा खर्च उनके पिी विजय की कमाई पर निर्भर है. उसके बाद भी सरस्वती बिष्ट का परिवार नन्हीं अनुष्का का खुशी-खुशी पालन पोषण कर रहा है.

सरस्वती के ‘बेटी बचाओ अभियान’ की सराहना करते हुए नागरिक मंच भी उन्हें वर्ष 2014 का पुरस्कार दे चुका है. गरीबों की सेवा और ‘बेटी बचाओ अभियान’ से जुड़ी सरस्वती को तीलू रौतेली पुरस्कार मिलने पर यहां विभिन्न संगठनों ने सराहना की है. कहा कि सरकार ने वास्तविक महिला को पुरस्कार दिया है.