चीन बॉर्डर की परियोजनाओं पर उत्तराखंड सरकार की नींद टूटी

उत्तराखंड में चीन सीमा से लगे इलाकों में सड़क योजनाओं को लेकर एक बार फिर उम्मीद जगी है. भूमि एवं वन पर्यावरण के अडंगों के चलते अटकी पड़ी चीन सीमा से लगी सामरिक महत्व की सैन्य परियोजनाओं के निस्तारीकरण को लेकर अब उम्मीदें परवान चढ़ने का इंतजार कर रही हैं.

सेना के भूमि संबंधित एक दर्जन से ज्यादा मामले राज्य में लटके पड़े हैं. इनके निस्तारण के लिए मुख्य सचिव ने सब एरिया मुख्यालय को चिट्ठी लिखकर इनके जल्द से जल्द निस्तारण की पहल की है.

गौरतलब है कि करीब ढाई साल पहले तत्कालीन मध्य कमान प्रमुख और मुख्यमंत्री के बीच हुई सिविल मिलिट्री लाइजनिंग कांफ्रेंस (सीएमएलसी) में सेना के रखे अधिकांश मामले लंबित पड़े हैं. मुख्य सचिव ने सेना से भूमि एवं अन्य मामलों में अब तक हुई प्रगति की रिपोर्ट मांगी है.

इससे सैन्य विस्तारीकरण के आड़े आ रही भूमि एवं वन पर्यावरण की प्रक्रिया में तेजी आने की उम्मीद है. उधर, सेना भी एक बार फिर सिविल मिलिट्री लाइजनिंग कांफ्रेंस कर लंबित मामलों पर मुख्यमंत्री और मध्य कमान प्रमुख के बीच बातचीत की तैयारी कर रही है.

माना जा रहा है कि जल्द लंबित मामलों पर सेना और सरकार के बीच बातचीत हो सकती है. उत्तरकाशी और चमोली जिले में वन पर्यावरण की अनापत्ति नहीं मिलने के कारण सेना की स्वतंत्र इन्फैंट्री ब्रिगेड सहित कुछ अहम योजनाएं लटकी हुई हैं.

5 नवंबर 2012 को सिविल मिलिट्री लाइजनिंग कांफ्रेंस (सीएमएलसी) में तत्कालीन मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा और मध्य कमान प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल अनिल चैत के बीच बैठक हुई थी. सेना ने उत्तराखंड में सेना का मौजूदा ढांचा तैयार करने के लिए भूमि की आवश्यकता के डेढ़ दर्जन प्रस्ताव दिए थे, जिनमें से वन पर्यावरण की आपत्तियों के चलते कई मामले लटके हैं.

भूमि संबंधित लंबित सामरिक महत्व की योजनाएं
– सेना को खनन और स्टोन क्रशर के लिए लाइसेंस
– 2005 से बनबसा (चंपावत) और कौसानी (अल्मोड़ा) में रुका वन भूमि का हस्तांतरण
– आर्टिलरी और फील्ड फायरिंग रेंज के लिए नंदा देवी व गंगोत्री क्षेत्र में भूमि
– सैन्य पड़ाव भूमि को राज्य सरकार को सौंप बदले में अन्यत्र भूमि
– पंतनगर और नैनीसैंणी में यूएवी बेस निर्माण के लिए 100 एकड़ भूमि की जरूरत
– देहरादून, रायवाला और जोशीमठ में वन क्षेत्र में भूमि की जरूरत

ये योजनाएं हो चुकी हैं पास
– आईएमए के सामने अंडरपास बनाने की योजना को मंजूरी
– धरासू-सानेल बार्डर रोड को बीआरओ को सौंपा
– सैनिक और पूर्व सैनिकों को हाउस टैक्स में रियायत दी गई
– आईएमए के लिए 3.9 एकड़ भूमि हस्तांतरण प्रस्ताव प्रक्रियाधीन

सीएमएलसी के बारे में जानें…
सिविल मिलिट्री लाइजनिंग कांफ्रेंस (सीएमएलसी) सेना की प्रत्येक कमान के स्तर पर हर साल होती है. कमान के ऑपरेशनल क्षेत्र जिन राज्यों में आते हैं, उनके मुख्यमंत्रियों के साथ जनरल आफिसर कमांडिंग इन चीफ (जीओसी इन सी) की वार्षिक बैठक होती है.

हिमाचल, पंजाब, हरियाणा में पश्चिम कमान के जीओसी इन सी की नियमित वार्षिक कांफ्रेंस होती है. मध्य कमान के तहत आने वाले राज्य में उत्तराखंड इस मामले में सबसे फिसड्डी है. सात साल बाद 2012 में सीएमएलसी हुई.

सेना की कोशिशों के बाद मुख्यमंत्री से समय नहीं मिलने के कारण सीएमएलसी आयोजित नहीं हो पाती हैं. इस बैठक में सेना के राज्य सरकार से संबंधित मामलों पर दोनों पक्ष प्रगति की समीक्षा करने के साथ उनके जल्द निस्तारण को सुनिश्चित करवाते हैं.