वाह! मंत्री जी, भाई के लिए बदलवा डाला विभाग का पूरा ढांचा

भई सत्ता का सुख मंत्री जी और उनके परिजन नहीं भोगेंगे तो इस सत्ता का क्या फायदा. शायद उत्तराखंड के एक मंत्री जी ने भी ऐसा ही सोचा होगा, इसलिए अपने भाई को मलाईदार पोस्टिंग देने के लिए आबकारी विभाग का पूरा ढांचा ही बदलवा डाला. भई वाह! इसे कहते हैं रसूक.

हालांकि इसके लिए तर्क दिया जा रहा है कि राजस्व बढ़ाने के लिए ढांचे में बदलाव किया गया है, लेकिन मंत्री जी की चुगली भी स्वयं राजस्व ने ही कर दी. क्योंकि मैदानी जिलों में तो पहले से ही राजस्व लक्ष्य से आगे है. यही नहीं, अब तो फील्ड में दो उपायुक्त कार्यालय होंगे, स्टाफ भी होगा और इससे सरकारी खजाने पर चोटे लगे तो लगे. मंत्री जी के भाई को सेट जो करना था.

यूपी में कानपुर, लखनऊ, मेरठ, गाजियाबाद, गोरखपुर जैसे बड़े जिलों में भी सहायक आबकारी आयुक्त जिले चलाते हैं. लेकिन राज्य में पदोन्नति पाकर जिलों से हटे सहायक आयुक्तों को मुख्यालय में सुकून नहीं मिला. इनमें एक अधिकारी मंत्री के भाई हैं. इसीलिए देहरादून व हरिद्वार को मिलाकर एक आबकारी डिवीजन बनाया जाएगा, ताकि मंत्री जी के भाई का दो जिलों पर सीधा नियंत्रण रहे. कोई उंगली ना उठाए इसलिए नैनीताल-उधमसिंह नगर को मिलाकर भी एक डिवीजन बनाए जाने का प्रस्ताव है. कैबिनेट बैठक में एक अन्य मंत्री ने इसकी वजह पूछी तो किसी के पास कोई जवाब नहीं था.

ऑफिस खुलेगा, स्टाफ भी रखा जाएगा, कार्यालय संचालन में मोटा खर्च होगा, हालांकि इसकी जरूरत भी नहीं थी. पूरा महकमा विरोध करता रहा लेकिन सवाल मंत्री जी के भाई का जो था. मुख्यमंत्री हरीश रावत ने भी इस मामले में वही किया जो बहुगुणा करना चाहते थे, लेकिन फर्क इतना था कि तब हरीश रावत इस फैसले के विरोध में थे.