अब बनेगा उत्तराखंड का अपना राज्य गीत, आप भी भेज सकते हैं एंट्री

उत्तराखंड को बने 15 साल हो गए हैं और अब उत्तराखंड सरकार ने एक अनोखी पहल की है. राज्य सरकार उत्तराखंड का एक राज्य गीत तैयार करने के लिए देशभर से एंट्री मंगवा रही है. राज्य गीत चयन समिति के अनुसार देशभर से मिलने वाली अर्जियों पर विचार करके राज्य गीत तैयार किया जाएगा.

यहीं नहीं जरूरत पड़ी तो एंट्रियों में बदलाव भी किए जा सकेंगे. राज्य गीत का विमाचन इस साल राज्य गठन की वर्षगांठ पर 8 नवंबर को किया जाएगा. सर्वश्रेष्ठ एंट्री को राज्य सरकार पुरस्कार भी देगी. संस्कृति विभाग की ओर से गठित राज्य गीत चयन समिति की पहली बैठक होने के साथ ही विरोध के स्वर भी उठने लगे हैं.

समूचे उत्तराखंड के लिए किसी एक बोली पर सहबति नहीं बन पायी. इसके बाद गीत को हिन्दी में तैयार करने पर मुहर लगाई गई है. इस गीत में राज्य के खास मेले, कौतिक, पर्व, त्योहार, उत्सवों के नाम भी होंगे. इस गीत में राज्य की सांस्कृतिक और लोक परंपराओं का समावेश होगा.

हालांकि गीत हिन्दी में होगा, लेकिन इसमें आंचनिक बोलियों की लाइनें भी डाली जाएंगी. संस्कृति विभाग की निदेशक बीना भट्ट के अनुसार 17 मार्च को समिति की अगली बैठक होगी. इसमें सुझावों की एंट्री के लिए निकाले जा रहे विज्ञापन पर भी अंतिम मुहर लग जाएगी. विज्ञापन के मुताबिक देशभर के लोग सीधे संस्कृति विभाग में या विभाग की ई-मेल आईडी पर एंट्री भेज सकते हैं. एंट्री की अंतिम तारीख 15 मई होगी.

गढ़वाली लोकगायक और राज्यगीत चयन समिति के सह-अध्यक्ष नरेंद्र सिंह नेगी का कहना है कि मैं जिंदगी भर गढ़वाली में गाने लिखता रहा हूं. ऐसे में हिंदी में गीत का चुनाव मुश्किल तो था, लेकिन यह राज्यहित में है. गाना भले हिंदी में होगा, लेकिन उसमें आंचलिक बोली का समावेश होगा. यही नहीं नेगी दा ने कहा, मैं अपने विरोधियों का स्वागत करता हूं. उनके लिए अपनी कुर्सी तक छोड़ सकता हूं. वह आएं और कमेटी का हिस्सा बनकर खुद गीत चुन लें.