अब उत्तराखंड परिवहन की बसों में बुजुर्ग मुफ्त में कर सकेंगे यात्रा

उत्तराखंड में बहुप्रचारित आबकारी नीति यानी एफएल-2 पर सोमवार को हुई कैबिनेट मीटिंग में कोई फैसला नहीं हो पाया. लेकिन इस मीटिंग में हुए एक फैसले ने बुजुर्गों के चेहरे पर खुशी बिखेर दी. स्वयं मुख्यमंत्री हरीश रावत की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट मीटिंग में बुजुर्गों के बसों में मुफ्त यात्रा के फैसले पर मुहर लगाई गई. अब राज्य के 65 साल या उससे ज्यादा उम्र के बुजुर्ग अब उत्तराखंड परिवहन निगम की बसों में मुफ्त यात्रा कर सकेंगे.

रावत कैबिनेट ने प्रस्ताव परीक्षण के लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता में समिति को सौंप दिया है. उत्तराखंड के लोगों के लिए बुरी खबर यह है कि सरकार ने बिजली वितरण के निजीकरण की तरफ पहला कदम बढ़ा दिया है. सरकार ने बिजली वितरण में प्रयोग के तौर पर निजीकरण को मंजूरी दी है. मंत्रिमंडल ने कई विभागों के ढांचे में बदलाव को भी मंजूरी दी है.

सोमवार को हुई इस कैबिनेट मीटिंग में कई विभागों के करीब 2 दर्जन एजेंडे शामिल थे. सरकार ने पहले ही निर्णय लिया था कि इस साल चारधाम यात्रा सीजन में 25 हजार बुजुर्गों को मुफ्त चारधाम यात्रा (किसी एक धाम की) कराई जाएगी. इसी के साथ अब सरकार ने 65 वर्ष या उससे ज्यादा उम्र के बुजुर्गों के लिए राज्य परिवहन निगम की बसों में मुफ्त यात्रा के फैसले को भी हरी झंडी दिखा दी है. इसके अलावा कैबिनेट ने परिवहन निगम को लोन के रूप में दी गई रकम को इक्विटी के रूप में बदलने का भी फैसला किया है.

बिजली वितरण का काम निजी हाथों में सौंपने की तैयारी भी सरकार ने कर ली है. कैबिनेट ने सोमवार को इस फैसले पर भी मुहर लगा दी, हालांकि फिलहाल ऊधमसिंह नगर जिले में काशीपुर और हरिद्वार जिले में रुड़की में पायलेट प्रोजेक्ट के तौर पर इसे शुरू किया जाएगा. विधानसभा के आगामी बजट सत्र को लेकर भी कैबिनेट में लंबी चर्चा हुई. कैबिनेट ने राज्यपाल के अभिभाषण को भी सामान्य चर्चा और थोड़े-बहुत बदलाव के बाद राज्यपाल को भेजने का फैसला किया.

कैबिनेट बैठक में केंद्र सरकार के बजट में राज्यों के लिए की गई कटौती पर भी चर्चा हुई. बैठक में फैसला लिया गया कि राज्य की केंद्र पोषित जो भी योजनाएं आधी-अधूरी रह गई हैं, उन्हें पूरा कराने के लिए सचिव स्तर पर बातचीत की जाएगी. बैठक में कहा गया कि अगले 2-3 महीने में साफ हो जाएगा कि केंद्र से किन योजनाओं में आर्थिक मदद मिलेगी और किन में नहीं. उसी आधार पर राज्य सरकार अपने संसाधन और वसूली बढ़ाने जैसे उपायों पर काम करेगी. खनन के जरिए और ज्यादा राजस्व उगाहने पर भी चर्चा हुई.