36 घंटे की बारिश ने छीनी किसानों की मुस्कान, 50 हजार बीघा फसल लेटी

बेमौसम बारिश ने उत्तराखंड में किसानों के लिए मुसीबत खड़ी कर दी है. रविवार को हुई बारिश से जहां किसानों को लगा कि यह उनकी फसल के लिए अच्छी साबित होगी, वहीं सोमवार की बारिश ने उनकी कमर तोड़ दी. सोमवार को बारिश के साथ चली हवा फसलों के लिए अभिशाप बनकर आयी. बारिश और तेज हवाओं के कारण गेहूं की फसल को भारी नुकसान पहुंचा है. सरकारी आंकड़ों के अनुसार अब तक 50 हजार बीघा फसल खेतों में बिछ गई है.

रविवार सुबह से शुरू हुई बारिश के कारण किसानों के चेहरे ख‍िल गए थे, क्यों‍कि इससे गेहूं एवं अन्य फसलों को फायदा हाने की उम्मीद थी. लेकिन जब रविवार शाम और सोमवार दिनभर बारिश नहीं रुकी तो किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें खिंचने लगीं. रुक-रुक कर बारिश जारी रहने के साथ ही रविवार की रात में तेज हवाओं के चलते गेहूं फसल खेतों में ही बिछ गई.

कृषि विशेषज्ञों की मानें तो अकेले हरिद्वार जिले में 46 हजार हेक्टेयर फसल से ज्यादा भूमि पर गेहूं की फसल खड़ी हुई है. अभी तक इसमें से तीन हजार हेक्टेयर से ज्यादा यानी करीब 50 हजार बीघा गेहूं खेतों में बिछ गया है. जिससे गेहूं के उत्पादन और गुणवत्ता पर विपरीत प्रभाव पड़ना लाजिमी है. सरसों, मशरूम, मटर वाले खेतों में भी बारिश ने जमकर कहर बरपाया है.

जिले के मंगलौर, लक्सर, पिरान कलियर, भगवानपुर, झबरेड़ा, सुल्तानपुर सहित सभी क्षेत्रों में गेहूं की फसलें खेतों में बिछ गईं. कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि अगर बारिश एक-दो दिन और नहीं रुकती तो फसलों को भारी नुकसान हो सकता है.