फिर एक हुए ऐरी व पंवार गुट, बदलेगी UKD की तस्वीर और तकदीर!

उत्तराखंड को अलग राज्य का दर्जा दिलाने के लिए कई वैचारिक शक्तियों ने एड़ी-चोटी का जोर लगाया और अंतत: साल 2000 में अपने लक्ष्य का हासिल भी कर लिया. बीजेपी और कांग्रेस लगातार उत्तराखंड में सत्ता का स्वाद चखते रहे, लेकिन उत्तराखंड क्रांति दल (UKD) कभी विकल्प के तौर पर दिखाई नहीं दिया. इस बीच पार्टी दो फाड़ हो गई, अब यही दोनों हिस्से एक बार फिर संयुक्त हो गए हैं.

यूकेडी के दोनों बड़े गुटों काशी सिंह ऐरी और त्रिवेंद्र पंवार ने पुराने विवादों को भुलाकर एक बार फिर एक होने का फैसला कर लिया है. दोनों गुटों के शीर्ष नेताओं काशी सिंह ऐरी और त्रिवेंद्र सिंह पंवार ने दोनों गुटों के विलय की औपचारिक घोषणा कर दी है.

गुरुवार को हरिद्वार में दोनों नेताओं की बीच हुई बैठक के बाद शुक्रवार को ज्वाइंट प्रेस कॉन्फ्रेंस करके दोनों नेताओं ने अपने इस फैसले का खुलासा किया. दोनों ने माना कि आपसी मतभेदों से अलग होने के कारण पार्टी को बहुत ज्यादा नुकसान झेलना पड़ा है.

केंद्रीय कार्यालय में हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस में दोनों शीर्ष नेताओं ने कहा कि संयुक्त यूकेडी किसी भी राष्ट्रीय दल को समर्थन नहीं देगा. दोनों नेताओं की ओर से कहा गया कि राज्य में यूकेडी को तीसरी शक्ति के तौर पर विकसित करने की कोश‍िशें तेज की जाएंगी.

ukdशीर्ष नेताओं ने कहा कि उत्तराखंड के हित में जो भी राजनीतिक दल यूकेडी को मजबूत करना चाहता है, उसका स्वागत है. पुरानी गलतियों से सबक लेते हुए यूकेडी अब नए लोग, नए जोश और नई सोच के साथ आगे बढ़ने के लिए संकल्पबद्ध है.

दोनों गुटों के बीच पिछले काफी समय से एकजुट होने की कोश‍िशें चल रही थीं. हरिद्वार में हुई बैठक के बाद यह तय किया गया है कि 19-20 मई को यूकेडी का द्विवार्षिक महाधिवेशन बुलाया जाएगा. इस बीच ऐरी गुट और पंवार गुट ने अपनी-अपनी कार्यकारिणि‍यां भी भंग कर दी हैं. इसके साथ ही संयुक्त यूकेडी के नए अध्यक्ष के चुनाव तक महाधिवेशन के लिए त्रिवेंद्र पंवार को संयोजक और हरीश पाठक को सह संयोजक बनाया गया है.

पार्टी ने एक बार फिर संकल्प जाहिर किया कि गैरसैंण को उत्तराखंड की स्थायी राजधानी बनाने को लेकर संघर्ष जारी रखेंगे. पार्टी ने आंदोलन के लिए कारगर नीति बनाने पर भी जोर दिया.