मदरसे के छात्रों ने की थी पूर्व पाक PM बेनजीर भुट्टो की हत्या

इस्लामाबाद।… पाकिस्तान की पूर्व प्रधानमंत्री बेनजीर भुट्टो की एक चुनाव प्रचार के दौरान 2007 में हत्या कर दी गई थी. बेनजीर की हत्या के मामले में 8 साल बाद अब एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है. वह यह कि बेनजीर की हत्या में ‘फादर आफ तालिबान’ के रूप में कुख्यात मौलवी समी उल हक द्वारा चलाए जाने वाले प्रमुख मदरसे के छात्र शामिल थे. यह जानकारी शुक्रवार को अधिकारियों ने दी.

सुरक्षा कारणों से आतंकरोधी अदालत (एटीसी) में रावलपिंडी की अडियाला जेल के भीतर जस्टिस परवेज इस्माइल मामले ने गुरुवार को मामले की सुनवाई की. पाकिस्तानी अखबार ‘डॉन’ के मुताबिक संघीय जांच एजेंसी (एफआईए) पेशावर के इंस्पेक्टर नसीर अहमद और सब-इंस्पेक्टर अदनान ने मदरसे ‘दारूल उलूम हक्कानिया’ के छात्रों के बेनजीर की हत्या में शामिल होने के बारे में कोर्ट को बताया.

दोनों सरकारी गवाहों ने अपने बयानों के समर्थन में जरूरी सबूत भी अदालत में पेश किए. दारूल उलूम हक्कानिया के शिक्षा निदेशक विसाल अहमद ने अपने वक्तव्य में कहा कि संदिग्ध आत्मघाती बम हमलावर अब्दुल्ला उर्फ सद्दाम नादिर उर्फ कारी इस्माइल और गिरफ्तार किए गए संदिग्ध रशीद उर्फ तुराबी व फैज मोहम्मद ने मदरसे में तालीम जरूर हासिल की थी, लेकिन उन्होंने इस बात से साफ इनकार किया कि मदरसे का उनसे कोई रिश्ता है.

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मदरसा हक्कानिया खैबर पख्तूनखवा के नौशेरा जिले के अकोरा खाटक इलाके में है. इस मदरसे को मौलवी समी उल हक चलाता है. इस मदरसे का नाम खतरनाक हक्कानी नेटवर्क के संस्थापक जलालुद्दीन हक्कानी सहित कई अन्य खतरनाक तालिबान आतंकवादियों और नेताओं को तैयार करने में आता है.

इस मदरसे में श‍िक्षा लेने वाले खुद के नाम के साथ ‘हक्कानी’ लगाते हैं. हक को ‘फादर ऑफ तालिबान’ के नाम से भी जाना जाता है. हक कई बार पाकिस्तान संसद का सदस्य भी रह चुका है और अब भी सक्रिय है. पाकिस्तानी प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने पिछले साल जब पाकिस्तान तालिबान से बातचीत की घोषणा की थी, तब हक उनके साथ बातचीत करने वाली टीम के प्रमुख बनाए गए थे.