रेल बजट: ‘प्रभु’ आपने भी उत्तराखंड के लिए कुछ नहीं किया

अब तो यही कहना पड़ेगा… हे ‘प्रभु’ आपने भी उत्तराखंड के लिए कुछ नहीं किया. गुरुवार को रेल मंत्री सुरेश प्रभु ने संसद में रेल बजट पेश किया. उत्तराखंड के लोगों को विकास के नाम पर सत्ता में आयी मोदी सरकार के रेल मंत्री से कई उम्मीदें थीं. लेकिन ये सभी उम्मीदें चकनाचूर हो गईं. यानी ‘प्रभु’ ने भी रेलवे नेटवर्क से जुड़ने की उत्तराखंड के पहाड़ों की इच्छा को अनसुना कर दिया.

रेल मंत्री ने ना तो उत्तराखंड के लिए किसी नई ट्रेन की घोषणा की और ना ही नई रेलवे लाइन बिछाने के बारे में कोई बात ही की. अंग्रेजों के जमाने में सर्वे किए गए और रेलवे लाइन बिछाने के लिए तैयार रूटों पर भी कोई बात नहीं हुई. यही नहीं उत्तराखंड के तराई के इलाकों में जहां ट्रेन सुविधा है भी तो ज्यादातर जगह सिंगल लाइन है, उन्हें डबल करने पर भी कोई ठोस पहल दिखायी नहीं दी.

हालांकि रेल मंत्री सुरेश प्रभु ने रेल बजट 2015 पेश करते हुए जनता को कई सौगातें दी, लेकिन कोई नई ट्रेन की घोषणा नहीं होने से उत्तराखंड को निराशा ही हाथ लगी. उत्तराखंड को नई ट्रेनों के लिए अभी और इंतजार करना पड़ेगा. बजट भाषण में रेल मंत्री का पूरा जोर जनता को ज्यादा से ज्यादा सुविधाएं देने पर रहा. रेल मंत्री ने यात्रियों को रिजर्वेशन कराने के लिए ज्यादा समय देने की बात कही है. अब रेलवे रिजर्वेशन 4 महीने पहले कराया जा सकता है. अब तक रेलवे रिजर्वेशन दो महीने पहले ही कराया जा सकता था.

मोदी सरकार के दूसरे रेल बजट (पहले पूर्ण रेल बजट) में यात्री किरायों में कोई बढ़ोतरी नहीं की गई है. रेलवे मंत्री सुरेश प्रभु ने अपने पहले रेल बजट में यात्री किरायों में वृद्ध‍ि नहीं की. हालांकि मोदी सरकार ने पिछले साल केंद्र में सत्ता की कमान संभालने के कुछ दिन बाद ही यात्री किरायों में 15 प्रतिशत की बढ़ोतरी की थी. सरकार के उस फैसले का भी जमकर विरोध हुआ था.

इस बार भी आशंका जताई जा रही थी कि रेलवे में सुधारों के लिए केंद्र सरकार यात्री किरायों में बढ़ोतरी कर सकती है. लेकिन सुरेश प्रभु की घोषणा को राहत भरा कदम माना जा सकता है.

उत्तराखंडवासियों को मोदी सरकार के रेल मंत्री ‘प्रभु’ से काफी उम्मीदें थीं. रेलवे के लिहाज से पिछले कई साल से देहरादून के हाथ सिर्फ मायूसी ही लग रही है. उत्तराखंड की अस्थायी राजधानी देहरादून के लोगों को इस रेल बजट से ढेरों उम्मीदें थीं. रेल यात्रियों का मानना था कि इस बार राज्य से पांचों सांसद केंद्र में सत्ताधारी बीजेपी के ही हैं. ऐसे में उम्मीदें जगी थीं कि ये सांसद रेल बजट में राज्य के लिए कुछ तो जरूर दिलवाएंगे. राज्य से जुड़ी हुई रेलवे की कई योजनाएं हैं, जिनका लोगों को काफी समय से इंतजार था और बेहद जरूरत भी थी.

देहरादून वासियों को उम्मीदें थीं कि दून स्टेशन पर प्लेटफॉर्म बढ़ेंगे तो गाड़ियों की संख्या भी बढ़ेगी. प्लेटफॉर्म छोटे होने के कारण देहरादून स्टेशन पर 13 कोच से ज्यादा लंबी ट्रेन नहीं आ पाती है. यात्रियों की संख्या ज्यादा होने के बावजूद कोच नहीं बढ़ाए जा सकते थे. दून स्टेशन के विस्तार की घोषणा होती तो उम्मीद की जा सकती थी कि हरिद्वार तक आने वाली 18 कोच वाली 13 ट्रेनों में से कुछ ट्रेनें दून तक भी आ पाएंगी.

देहरादून वासियों को उम्मीदें थीं कि इस बार रेल मंत्री के पिटारे से देहरादून के लिए कुछ और गाड़ियां निकलेंगी. हल्द्वानी, कानपुर, इलाहाबाद, लखनऊ, पंजाब, दिल्ली और दक्षिण भारत की तरफ गाड़ियों का रूट बढ़ेगा तो यात्रियों का सफर और भी आसाना हो जाएगा. दैनिक रेल यात्रियों को देहरादून और सहारनपुर के बीच रेल सफर आसान होने की भी उम्मीद थी. देहरादून से वाया विकासनगर सहारनपुर रेल लाइन का प्रस्ताव लंबे समय से लटका पड़ा है. फिलहाल देहरादून से हरिद्वार और लक्सर होते हुए करीब 128 किलोमीटर की दूरी तय करके सहारनपुर जाना पड़ता है.

विकासनगर से दूरी भी कम होती और इस रूट पर ट्रेनें सीमित होने से समय भी कम लगेता. रेल लाइन के जरिए उत्तराखंड को हिमाचल से जोड़ने की बड़ी महत्वाकांक्षी योजना सालों से कागजों पर ही है. इस रेल लाइन को बिछाने की हरी झंडी मिल जाती तो यह उत्तराखंड व हिमाचल दोनों पहाड़ी राज्यों के लिए बेहद फायदेमंद साबित होगा. दोनों राज्यों में कई मामलों में इससे व्यापार को भी बढ़ावा मिलता.

क्षेत्रवासी उम्मीद कर रहे थी कि इस बार रेल बजट में प्रभु हरिद्वार से देहरादून के बीच रेल लाइन को डबल करने की भी घोषणा करेंगे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ. सिंगल लाइन होने के कारण हरिद्वार से देहरादून पहुंचने में दो-ढाई घंटे तक लग जाते हैं. तीर्थनगरी ऋषिकेश और उससे सटे बड़े क्षेत्र के लोगों की भी रेल लाइन से देहरादून से जुड़ने की काफी इच्छा है. लोग उम्मीद कर रहे थे कि रेल मंत्री इस बार बार जरूर इस योजना को हरी झंडी देंगे, उन्हें भी मायूसी ही हाथ लगी.