मनोरमा डोबरियाल के निधन के बाद उत्तराखंड कांग्रेस में राज्यसभा के लिए तकरार

देहरादून।… उत्तराखंड के दो कद्दावर नेताओं, राज्य सरकार में मंत्री रहे सुरेंद्र राकेश और फिर सांसद मनोरमा डोबरियाल शर्मा के निधन से राजनीति में रिक्तता के साथ ही तकरार मचना भी तय है.

सुरेंद्र राकेश के निधन के बाद कांग्रेस भगवानपुर विधानसभा सीट से उम्मीदवारी और मंत्रिमंडल की खाली जगह भरने की रणनीति पर काम कर ही रही थी कि अचानक मनोरमा शर्मा के निधन ने पार्टी को धक्का पहुंचा दिया. अब राज्यसभा सीट को लेकर फिर से गोलबंदी और दावेदारी शुरू हो जाएगी.

पार्टी के लिए भगवानपुर विधानसभा और राज्यसभा की खाली सीट को भरना आने वाले दिनों में बेहद चुनौतीपूर्ण होने वाला है. बीएसपी के उम्मीदवार न उतारने की घोषणा के बाद उम्मीद है कि भगवानपुर सीट पर सुरेंद्र राकेश के परिवार से ही पत्नी या भाई को कांग्रेस का उम्मीदवार बनाया जाए. जबकि राज्यसभा सीट को लेकर नए सिरे से रणनीति तैयार करनी होगी.

मनोरमा शर्मा की उम्मीदवारी ने न सिर्फ बहुगुणा खेमे को बल्कि रावत खेमे को भी हैरानी में डाला था. दरअसल मनोरमा शर्मा का नाम सीधे सोनिया गांधी ने प्रस्तावित किया था, जिसे स्वीकार करना बहुगुणा और रावत दोनों खेमे के लिए लाजिमी था. उस समय मनोरमा राज्य की क्षेत्रीय और जातीय राजनीति में गढ़वाल-ब्राह्मण समीकरण में भी फिट बैठी थीं.

राज्यसभा सीट को लेकर एक बार फिर पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा दावेदारी जता सकते हैं. बहुगुणा कैंप अभी तक मंत्रिमंडल में जगह पाने के लिए सक्रिय था, अब वह एक साथ दोनों मोर्चो पर हल्ला बोल सकता है.

मनोरमा कांग्रेस की उस राजनीतिक जमात से ताल्लुक रखती थीं, जिसकी पहचान गुटबाजी और तड़क-भड़क से दूर जमीनी तौर पर सक्रिय रहने की थी. मनोरमा आम कार्यकर्ताओं के बीच अपनी उम्मीदवारी से आस जगाकर गई हैं, ऐसे में दावेदारों की संख्या बढ़ती ही जाएगी और पार्टी की मुश्किलें भी.

राज्यसभा में मनोरमा के 84 यादगार दिन
1. राज्यसभा की शपथ लेने के बाद दंत्तेवाड़ा में सीआरपीएफ जवानों पर हुए हमले पर उन्होंने आवाज उठाई. उन्होंने प्रधानमंत्री से कठोर कदम उठाने की मांग की.
2. कैलाश मानसरोवर यात्रा सिर्फ उत्तराखंड के धार्मिक महत्व वाले प्राचीन मार्ग से ही चलते रहने की पैरवी राज्यसभा में की.
3. चारधाम को जोड़ने वाले नए प्रस्तावित सीमांत टनल मार्ग को मूर्त रूप दिलाने के लिए केंद्रीय मंत्रियों से मुलाकात कर पैरवी की.
4. कर्णप्रयाग-ऋषिकेश रेललाइन के साथ राज्य में अन्य क्षेत्रों में रेल सुविधाएं बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार और रेल मंत्री के पास आवाज उठाई.
5. देहरादून की पेयजल व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए लंबित और ठप पड़ी सौंग नदी पेयजल योजना पर नए सिरे से केंद्र सरकार से मदद मांगी.