उत्तराखंड में 11 नए जिले और 70 नए ब्लॉक बनाएगी सत्तारूढ़ कांग्रेस पार्टी

देहरादून।… उत्तराखंड में सत्तारूढ़ कांग्रेस पार्टी जनता के बीच अपनी पैठ मजबूत करने के लिए संगठन का विस्तार करने जा रही है. सांगठनिक ढांचे में बड़े बदलाव के पीछे विषम भौगोलिक क्षेत्रफल और कार्यकर्ताओं की आम जनता से ज्यादा नजदीकी के तर्क दिए गए हैं.

अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) ने राज्य इकाई के प्रस्ताव पर मुहर लगाई तो पार्टी संगठन के 11 नए जिले और 70 ब्लाक बनेंगे. इसके साथ ही जिला और ब्लॉक इकाइयों में बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं को समायोजित करने का रास्ता साफ हो जाएगा.

राज्य में फिल्हाल कांग्रेस के 17 सांगठनिक जिले और 158 ब्लॉक हैं. लोकसभा चुनाव में मिली करारी हार के बाद पार्टी जनता में अपनी जड़ें मजबूत करने की रणनीति पर काम कर रही है. इसके लिए सांगठनिक स्वरूप में व्यापक बदलाव की पैरवी की जा रही है.

नए परिसीमन के बाद विधानसभा सीटों पर हुए बदलाव को ध्यान में रखकर पार्टी ने नए जिलों और ब्लॉकों का प्रस्ताव एआइसीसी को भेजा है. नए परिसीमन में पर्वतीय क्षेत्रों में विधानसभा की 6 सीटें कम हुई हैं, जबकि मैदानी इलाकों की सीटों में इतना ही इजाफा हुआ है. पर्वतीय क्षेत्रों में बड़े क्षेत्रफल के चलते जिलास्तरीय इकाइयों के कामकाज में पेश आ रही दिक्कतों को ध्यान में रखकर परिसीमन किया गया है.

अल्मोड़ा में रानीखेत, पिथौरागढ़ में डीडीहाट, नैनीताल में रामनगर, ऊधमसिंहनगर में बाजपुर, पौड़ी में कोटद्वार, उत्तरकाशी में यमुना घाटी, टिहरी में जौनपुर-थत्यूड़ और देहरादून में पछवादून नाम से नए जिले प्रस्तावित किए गए हैं. इसी तरह बड़े सांगठनिक ब्लॉकों को भी दो भागों में बांटा गया है. नए प्रस्तावों में जिलों की संख्या 17 से बढ़ाकर 28 और ब्लॉकों की संख्या 158 से बढ़ाकर 228 की गई है.

उत्तराखंड कांग्रेस अध्यक्ष किशोर उपाध्याय के मुताबिक नए प्रस्तावित ढांचे में दूरदराज के क्षेत्रों में भी जिला और ब्लॉक इकाइयां गठित करने पर जोर है, ताकि कार्यकर्ताओं की पहुंच आम जनता तक हो सके.

गौरतलब है कि जिला और ब्लॉक में नई इकाइयां होने से काफी संख्या में कार्यकर्ताओं को संगठन में खपाया जा सकता है. छोटी इकाइयों के जरिए पार्टी जनता के साथ संपर्क और बेहतर कर सकेगी. सदस्यता अभियान के मुख्य समन्वयक जोत सिंह बिष्ट के अनुसार नए सांगठनिक बदलाव से पार्टी से ज्यादा से ज्यादा लोग जुड़ेंगे. संगठनात्मक इकाइयों के परिसीमन में पार्टी के दूरदराज तक पहुंचने के लक्ष्य को ध्यान में रखा गया है.