ये कह कर… कहीं बहुगुणा पर तो तंज नहीं मार रहे CM हरीश रावत!

देहरादून।… उत्तराखंड के मुख्यमंत्री हरीश रावत का कहना है कि साल 2000 में अलग राज्य बनने के बाद से अब तक उत्तराखंड 8 मुख्यमंत्री देख चुका है. उन्होंने कहा, अगर उत्तराखंड अलग राज्य नहीं बनता और हम उत्तर प्रदेश का ही हिस्सा होते तो उन 8 में से कई तो मंत्री भी न बन पाते. कहीं ये बयान देकर मुख्यमंत्री ने बार-बार उनके लिए मुसीबतें खड़ी कर रहे वरिष्ठ कांग्रेस नेता और पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा पर तो तंज नहीं कसा है.

ये कयास इसलिए भी लगाए जा रहे हैं कि बहुगुणा, हरीश रावत सरकार से खुश नहीं हैं और बहुगुणा को मुख्यमंत्री पद से हटाने के बाद ही आलाकमान ने हरीश रावत को इस पद पर बिठा दिया था. दोनों नेताओं के बीच सियासी रंजिश कोई नई बात भी नहीं है. हालांकि हरीश रावत ने किसी का नाम नहीं लिया, लेकिन बहुगुणा व हरीश रावत के हालिया बिगड़ते रिश्तों के कारण विशेषज्ञ मुख्यमंत्री के बयान के कई मतलब निकाल रहे हैं.

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य ने हमें क्या दिया और हमने उसके लिए क्या किया, अब इसके मूल्यांकन की जरूरत है. उन्होंने कहा, पटवारी पद से रिटायर होने वाले यहां एडीएम बन गए तो क्लर्क संयुक्त सचिव. नगर निगम सभागार में प्राथमिक शिक्षक संघ की ओर से आयोजित रिटायर टीचरों के विदाई समारोह में मुख्यमंत्री ने यह बात कही.

हरीश रावत ने शिक्षा के लिए बनने वाली नीति में शिक्षकों को प्रतिनिधित्व देने और कक्षा एक से आठवीं तक के लिए पहले की ही तरह शैक्षिक सत्र जुलाई से किए जाने की घोषणा की. सीएम ने कहा कि जूनियर हाईस्कूल से हाईस्कूल के रूप में उच्चीकृत स्कूलों को अलग संचालित करने का निर्देश वे दे चुके हैं.

मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षकों को समाज की जरूरत के अनुसार काम करना होगा. कहा कि दूसरे राज्यों की तुलना में उत्तराखंड में टीचरों को ज्यादा वेतन और सुविधाएं दी गई हैं. विकास कार्यों के आधार पर उन्होंने कहा कि उत्तराखंड तीन-चार जिलों का प्रदेश बनकर रह गया है. समारोह में प्राथमिक शिक्षक संघ के प्रांतीय महामंत्री दिग्विजय चौहान ने शिक्षक संगठन का 11 सूत्री मांग पत्र प्रस्तुत किया.