20 साल बाद श‍िवरात्रि पर बन रहा जबरदस्त योग, होगा बेहद फलदायी

हरिद्वार।… इस साल शिवरात्रि का त्योहार मंगलवार और श्रवण नक्षत्र के योग में होगा. यह योग 20 साल के बाद बन रहा है. इस कारण इस साल की शिवरात्रि बेहद खास होगा.

शिवरात्रि का त्योहार 17 फरवरी को मनाया जाएगा. ज्योतिषाचार्यों के अनुसार शिवरात्रि पर मंगलवार का दिन और श्रवण नक्षत्र का योग वर्ष 1995 की शिवरात्रि में पड़ा था. मंगलवार का दिन भोलेनाथ को अधिक प्रिय होता है. इस साल शिवरात्रि की दूसरी खासियत यह है कि यह शिवरात्रि प्रदोष (त्रयोदशी) से युक्त होगी.

17 फरवरी को दोपहर 12 बजकर 35 मिनट के बाद चतुर्दशी तिथि प्रारंभ होगी. साथ ही दोपहर 12 बजकर 15 मिनट के बाद श्रवण नक्षत्र शुरू होगा. यह संयोग 58 सालों के बाद बन रहा है. साल 1957 में भी चतुर्दशी तिथि त्रयोदशी और श्रवण नक्षत्र से युक्त थी.
श्रवण नक्षत्र का स्वामी चंद्रमा होता है. भगवान शिव चंद्रमा को अपने मस्तक पर धारण करते हैं, इसलिए इस साल दो-दो योग मंगल और श्रवण नक्षत्र योग और प्रदोष में श्रवण नक्षत्र का योग शिव भक्तों पर अधिक कृपा बरसाएगा.

ज्योतिषाचार्यों इस साल लगातार तीन दिनों तक पितृ पूजा, कालसर्प पूजा और भगवान शिव की पूजा का विशेष महत्व रहेगा. 16 फरवरी को सोम प्रदोष व्रत, 17 फरवरी मंगलवार को प्रदोष युक्त शिवरात्रि और 18 फरवरी को बुधवारी अमावस्या विशेष फलदायी है.

पुराणों में कहा है कि जो मनुष्य सालभर में कभी भी उपवास नहीं करता है, लेकिन वह शिवरात्रि पर व्रत रखता है तो उसे सालभर उपवास रखने का फल प्राप्त हो जाता है. शिवरात्रि के दिन भोलेनाथ का जलाभिषेक करने के साथ ही गंगा स्नान और दान का अधिक पुण्य माना जाता है.