विजय बहुगुणा ने एक बार फिर बढ़ाई मुख्यमंत्री हरीश रावत की मुश्किल

देहरादून।… राज्य मंत्रिमंडल में खाली हुए एक पद को लेकर सत्तारूढ़ कांग्रेस पार्टी के भीतर खींचतान तेज हो गई है. पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता विजय बहुगुणा के एक बार फिर नाराजगी जताकर मुख्यमंत्री हरीश रावत की मुश्किलें बढ़ा दी हैं. एक पखवाड़े के भीतर यह दूसरा मौका है, जब बहुगुणा ने हाईकमान के दर पर दस्तक दी और मुख्यमंत्री हरीश रावत को भी दिल्ली दौड़ लगाने को मजबूर कर दिया.

हालांकि, एकमात्र मंत्री पद को लेकर कांग्रेस में स्थिति ‘एक अनार, सौ बीमार’ जैसी है. पूर्व मुख्यमंत्री बहुगुणा अपने खेमे के नेताओं को यह सीट देने के लिए भले ही जोर लगा रहे हों, लेकिन पार्टी के भीतर कई दूसरे कद्दावर नेताओं की निगाहें भी इस पर गड़ी हुई हैं.

राज्य में कैबिनेट मंत्री रहे सुरेंद्र राकेश के निधन से मंत्रिमंडल में खाली हुई एक सीट भरने को लेकर मुख्यमंत्री हरीश रावत जल्दबाजी नहीं दिखाना चाहते, लेकिन पार्टी के भीतर दिग्गजों के बीच रह-रहकर तलवारें म्यान से बाहर आ रही हैं. सितारगंज में सरकारी भूमि के पट्टाधारकों को मालिकाना हक दिए जाने के मुद्दे पर सरकार पर दबाव बना चुके बहुगुणा अब किसी भी तरह सियासी नफा-नुकसान के गुणा-भाग में पीछे हटने को तैयार नहीं हैं.

जनवरी के अंतिम दिनों में कांग्रेस हाईकमान और केंद्रीय नेताओं से नई दिल्ली में मुलाकात कर राज्य सरकार के कामकाज पर असंतोष जता चुके बहुगुणा ने बीते शुक्रवार को कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से मुलाकात कर राज्य सरकार के खिलाफ एक बार फिर मोर्चा खोल दिया. सोनिया से मुलाकात के बाद बहुगुणा ने मुख्यमंत्री हरीश रावत की कार्यशैली पर भी सवाल खड़े किए.

पूर्व मुख्यमंत्री के इस रुख को पार्टी पर दबाव बढ़ाने की कोशिश माना जा रहा है. हालांकि वर्ग-चार की भूमि के नियमितीकरण पर बहुगुणा की नाराजगी दूर करने के लिए राज्य मंत्रिमंडल फैसला ले चुकी है, लेकिन सूत्रों की मानें तो मंत्रिमंडल के एक पद को बहुगुणा अपने खाते में लाने के लिए जोर लगाए हुए हैं.

बहुगुणा के इस सियासी दांव की काट के लिए मुख्यमंत्री हरीश रावत को शनिवार को नई दिल्ली का रुख करना पड़ा. यह अलग बात है कि मुख्यमंत्री खेमे की ओर से इसे सिरे से खारिज करने की कोशिश की गई है. सूत्रों की मानें तो हरीश रावत की ओर से कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से मिलने का वक्त मांगा गया है. वक्त मिलने पर मुख्यमंत्री फिर दिल्ली दौड़ लगा सकते हैं.

मंत्री पद को लेकर सिर्फ बहुगुणा ही नहीं, बल्कि मुख्यमंत्री को चारों ओर से दबाव झेलना पड़ रहा है. मुख्यमंत्री के करीबियों के मुताबिक मंत्री पद पर फैसला हरिद्वार में खाली हुई भगवानपुर सीट पर उपचुनाव के बाद लिया जा सकता है. इससे पहले मंत्री पद दिए जाने को सियासी तौर पर मुफीद नहीं माना जा रहा है.

उधर, मुख्यमंत्री विरोधी खेमा इससे इत्तेफाक रखने को तैयार नहीं है. पूर्व मुख्यमंत्री बहुगुणा जहां नरेंद्रनगर विधायक सुबोध उनियाल के लिए पैरवी कर रहे हैं तो पूर्व कैबिनेट मंत्री और डोईवाला के विधायक हीरा सिंह बिष्ट, जसपुर के विधायक शैलेंद्र मोहन सिंघल, पूर्व मंत्री व विकासनगर के विधायक नवप्रभात, पूर्व मंत्री व बदरीनाथ के विधायक राजेंद्र भंडारी को भी मंत्री पद के दावेदारों में माना जा रहा है.